बुलंदशहर। फाल्गुन शुक्ल की अष्टमी शुक्रवार से होलाष्टक शुरू हो गए हैं। अब 13 मार्च तक शादी, विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इन दिनों में आध्यात्मिक कार्य होंगे। वहीं, इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया भी रहेगा।
पंडित राज शर्मा ने बताया कि होली से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। इसलिए उसमें कोई शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। होलाष्टक के समय कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, जमीन खरीदना, निर्माण कार्य करना, मुंडन, नामकरण और गृह प्रवेश नहीं करने चाहिए। बताया कि शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के प्रथम दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु ग्रह अपने उग्र रूप में होता है। इसके चलते मस्तिष्क तमाम तरह के विकारों और परेशानियों से घिरा रहता है। इसलिए इस दौरान कोई भी काम बिगड़ने के ज्यादा आसार रहते हैं। ऐसे में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का पूजन करें।
वहीं, होलाष्टक भक्त प्रह्लाद से जुड़ा है। प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे। उनकी भक्ति उसके पिता राजा हिरण्यकश्यप को रास नहीं आई। होलाष्टक के दिन से ही भक्त प्रह्लाद को कारागार में बंद कर होलिका में जलाने की तैयारी की गई। आठ दिन प्रह्लाद को कई तरह के कष्ट दिए। उन्होंने यह भी बताया कि होलाष्टक की समाप्ति 13 मार्च को होगी। इसके अगले दिन 14 को दुल्हेंडी होगी।
2350 से अधिक स्थानों पर होगा होलिका दहन, निकलेंगे जुलूस
जिले में होली की तैयारियां तेज हो गई हैं। वहीं, बाजारों में भी रौनक छाने लगी है। रंग और गुलाल की दुकान सज गई और होली पर बनाए जाने वाले व्यंजनों की बाजार में भरमार है। जैसे-जैसे होली नजदीक आती जा रही है तो बाजारों में भीड़ भी बढ़ती जा रही है। इस बार जिले में 2350 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन होगा। इसके साथ ही जुलूस निकाले जाएंगे।