मच्छरों के डंक के बीच दरी पर सोने को मजबूर हैं खिलाड़ी
बुलंदशहर। पहली बार जिले में आयोजित हो रही माध्यमिक विद्यालयों की प्रदेश स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता के खिलाड़ी अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं। जिन स्कूलों में उन्हें ठहराया गया है, वहां सोने के लिए सिर्फ दरी की व्यवस्था की गई है। कुछ तो दरी भी फटी हुई हैं। बिजली कटने पर जनरेटर तक का इंतजाम नहीं है। दिनभर थकेहारे खिलाड़ी मच्छरों के डंक के कारण सो भी नहीं पा रहे हैं। न तो पीने का साफ पानी मिल रहा है और न ही पौष्टिक भोजन। जहां खिलाड़ियों को ठहराया गया है, शनिवार रात को उन स्कूलों की पड़ताल में यह हकीकत सामने आई।
डीएवी इंटर कॉलेज
शनिवार की रात साढ़े आठ बजे नगर स्थित डीएवी कॉलेज के कमरों में कुछ खिलाड़ी दरी पर सो रहे थे, कुछ बैठकर बातें कर रहे थे। खिलाड़ियों ने बताया कि यहां पर कोई सुविधा नहीं है। सोने के लिए दरी दे दी है, वह भी फटी हुई है। रात के समय मच्छर काटते हैं। वह लोग सो नहीं पाते। मच्छर भगाने के लिए आलआउट भी अपने पैसे से खरीदनी पड़ रही है। पानी भी स्वच्छ नहीं मिल रहा है। रात में बिजली चली जाने पर अंधेरा हो जाता है। गर्मी का भी सामना करना पड़ता है।
राजकीय इंटर कॉलेज
रात पौने नौ बजे राजकीय इंटर कॉलेज में भी खिलाड़ी कमरों में फर्श पर दरी बिछाकर बैठे थे। वह दरी भी फटी हुई थी। इतना ही नहीं साफ-सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। खिलाड़ियों ने बताया कि रात में बिजली जाने पर जनरेटर नहीं चलाया जाता। मच्छरों का डंक सोने नहीं देता। पूरे दिन की थकान होने के बाद भी नींद नहीं मिल पा रही है। पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ता है। स्वच्छ पेयजल की भी व्यवस्था नहीं की गई है।
मुस्लिम इंटर कॉलेज
रात सवा नौ बजे मुस्लिम इंटर कॉलेज में पहुंचे तो कमरों से बाहर खिलाड़ी खड़े मिले। खिलाड़ियों का कहना था कि कमरों में रहने से मच्छर काटते हैं। इसलिए खुली हवा में टहल रहे हैं। मौसम कुछ ठंडा हो जाएगा तो कमरों में सोने के लिए जाएंगे। खिलाड़ियों ने बताया कि आयोजकों की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। दरी पर सोना मजबूरी है और रात को बिजली चली जाए तो परेशानी और बढ़ जाती है।
भटूरे और कुलचे से भर रहे पेट
खिलाड़ियों ने बताया कि उन्हें खाने के लिए पूरे पैसे नहीं दिए जा रहे। कभी भटूरे तो कभी कुलचे खाकर पेट भरना पड़ रहा। प्रति दिन प्रति खिलाड़ी 150 रुपये के बजट का ही प्रावधान है। इसमें भी खिलाड़ियों को कभी 120 तो कभी 140 रुपये ही मिल रहे। कुछ कोच तो खिलाड़ियों को पैसा न देकर खुद ही खाने का इंतजाम करवा रहे हैं।
प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता पहली बार हो रही है। डीआईओएस के निलंबन के बाद मुझे प्रभारी डीआईओएस की जिम्मेदारी मिली। प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के लिए हर संभव प्रयास किया गया। इतने बड़े आयोजन को कम समय में करवाना आसान नहीं है। कुछ समस्याएं हैं तो उन्हें दूर करवा दिया जाएगा।
- विनोद कुमार, प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक एवं प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज