हिंदी को अंतर्राष्टीय स्तर तक पहुंचाने वाले साहित्यकारों ने इस जनपद की मिट्टी पर जन्म लिया। रीतिकाल से लेकर आज तक जनपद के साहित्यकारों ने हिंदी भाषा को दुनिया में पहचान दिलाई। रीतिकाल में महाकवि सेनापति से शुरू हुए हिंदी साहित्य को आज मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास दुनियाभर में बिखेर रहे हैं।
रीतिकाल के सबसे बड़े साहित्यकार महाकवि सेनापति का जन्म अनूपशहर में हुआ था। महाकवि सेनापति की शख्सियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन पर आज पीएचडी की जाती हैं। महाकवि सेनापति पर पहली पीएचडी करने वाले डॉ. चंद्रपाल शर्मा भी बुलंदशहर के रहने वाले हैं।
वह पिलखुआ के राणा कॉलेज में हिंदी के एचओडी भी रहे। प्रेम की पीर के महाकवि धनानंद ने भी इसी धरती पर जन्म लिया। वह जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव चांदौक के रहने वाले थे। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार डॉ. कमल किशोर गोयनका भी बुलंदशहर के हैं।
उन्हें मुंशी प्रेमचंद्र पर कई किताबें लिखीं। नगर में स्थित गौरीशंकर महाविद्यालय इनके बाबा के नाम पर हैं। इसके अलावा केंद्रीय हिन्दी संस्थान आगरा में निदेशक के पद पर रहे प्रोफेसर महावीर सरन जैन भी बुलंदशहर के प्रीत विहार के रहने वाले हैं।
फिल्मी दुनिया को कई मशहूर गीत देने वाले मशहूर गीतकार संतोष आनंद का जन्म भी बुलंदशहर के सिकंदराबाद में हुआ। इसके अलावा आचार्य चर्तुसेन शास्त्री भी सिकंदराबाद के हैं। आचार्य का उपन्यास वैशाली की नगर वधू काफी प्रसिद्ध हुआ।
इसके अलावा मशहूर गीतकार शिशुपाल सिंह निर्धन और वीर रस के कवि डॉ. ओमपाल सिंह निडर भी खुर्जा के रहने वाले हैं। मशहूर वीर रस के कवि हरिओम पंवार का जन्म भी बुलंदशहर के बराल गांव में हुआ। जामिया मिलीया कॉलेज के प्रोफेसर और मशहूर हास्य कवि काका हाथरसी के दामाद अशोक चक्रधर भी खुर्जा के रहने वाले हैं।
मशहूर गीतकार डॉ. कुमार विश्वास भी बुलंदशहर के गांव नवादा के मूल निवासी हैं। उनके भाई डॉ. विकास शर्मा डीएवी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य हैं। प्रसिद्ध कवियत्री डॉ. वंदना शर्मा भी बुलंदशहर की हैं। कविताआें को मुखर करने वाले डॉ. चंद्रभूषण शर्मा मुखर भी जहांगीराबाद के गांव नवीनगर के रहने वाले हैं।
भारत का सबसे महंगा कवि भी जनपद का
हिंदी साहित्य को हाईटेक करने का श्रेय यदि किसी कवि को जाता है तो वह हैं डॉ. कुमार विश्वास। डॉ. कुमार विश्वास हिंदी साहित्य जगत को नई पहचान दिलाई। इसके अलावा डॉ. कुमार विश्वास भारत के सबसे महंगे कवियों में शुमार होते हैं। उनके एक कार्यक्रम की फीस पांच से सात लाख रुपये तक होती है, जो अन्य किसी भी कवि की नहीं है।