गाजियाबाद। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बहुचर्चित 15 करोड़ रुपये के कथित ऋण घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में आरोपियों की ओर से दाखिल डिस्चार्ज अर्जी पर शनिवार को सुनवाई हुई। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आदेश के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है।
यह मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की शिकायत पर 24 दिसंबर 2018 को सीबीआई ने दर्ज किया था। इसकी शिकायत तत्कालीन क्षेत्रीय प्रमुख पवन कुमार गौर ने दी थी। मामले में तत्कालीन बैंक अधिकारियों शेफाली शर्मा और करन दीप सिंह समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। सीबीआई का आरोप है कि सभी ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 15 करोड़ रुपये का कार्यशील पूंजी ऋण स्वीकृत कराया, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा।
जांच एजेंसी के अनुसार मेसर्स जेआर फूड्स ने वर्ष 2017 में 15 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ प्रस्तुत वित्तीय दस्तावेजों, कारोबार के विवरण और लाभ हानि संबंधी अभिलेखों की जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं। सीबीआई का दावा है कि ऋण स्वीकृति के लिए लगाए गए दो बड़े खरीद आदेश भी फर्जी पाए गए। इसके अलावा बैंक स्तर पर आवश्यक सत्यापन और वित्तीय जांच की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सीबीआई इस मामले में वर्ष 2020 में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। अब सभी की निगाहें 28 जुलाई को आने वाले अदालत के आदेश पर टिकी हैं।