स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल रहे कुपोषित बच्चे
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जनपद में भले ही कुपोषित-अति कुपोषित बच्चों की संख्या एक लाख को पार कर गई हो, लेकिन सरकारी तंत्र को कुपोषित - अति कुपोषित बच्चे नजर नहीं आ रहे हैं। लापरवाही तब है जब एडी हेल्थ और डीएम स्वास्थ्य अफसरों फटकार चुके हैं। रविवार को भी केंद्र पर महज तीन बच्चे मिले।
जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित है। केंद्र की स्थापना अति कुपोषित (लाल श्रेणी) बच्चों को बेहतर खानपान देकर सामान्य श्रेणी में लाने के लिए की गई है। इसके लिए केंद्र में हर एक अति कुपोषित बच्चे को 50 रुपये का पौष्टिक आहार (फ्रूट, ड्राई फ्रूटस आदि) देने की व्यवस्था है।
एक समय में केंद्र पर 12 बच्चों को रखा जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य अफसरों को जिले में अति कुपोषित बच्चे ही नहीं मिल रहे हैं। यही कारण है कि केंद्र में लाल श्रेणी के औसतन पांच से अधिक बच्चे भर्ती नहीं किए गए। सीएमओ डॉ. केएन तिवारी का कहना है कि पोषण पुनर्वास केंद्र में अति कुपोषित बच्चों की भर्ती कम है।