तीन दशक में 180 फुट से नीचे चला गया भू-जलस्तर
बुलंदशहर। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन और जल संरक्षण व वर्षा जल संचय पर ध्यान न दिए जाने से जिले में स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। करीब तीन दशक पूर्व जहां जल स्तर 40 से 75 फुट था, आज वहां पानी 180 फुट नीचे पहुंच चुका है। दो दशक पूर्व जनपद में भूगर्भ जल स्तर तेजी से गिरने लगा था। गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए जिले के 12 ब्लॉकों को डार्कजोन घोषित कर दिया गया और अंधाधुंध जल दोहन पर रोक लगा दी गई। इसके बावजूद इन ब्लॉकों को डार्कजोन से निकालने के लिए कोई समुचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जो चार ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में हैं, वहां भी अब लगातार भूगर्भ जल स्तर लगातार गिर रहा है।
रजवाहों के साथ तालाबों की सफाई और जीर्णोद्धार के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। जल संचयन के लिए सरकारी कार्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाए गए। लेकिन इनकी ओर किसी का ध्यान नहीं है। शासन और प्रशासन की ओर से जल संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान भी समय-समय पर चलाए गए। बावजूद इसके लोगों में जागरूकता नहीं है। सबमर्सिबल से पानी बर्बाद हो रहा है और इस ओर भी किसी का ध्यान नहीं जाता है। यह अलग बात है कि तीन ब्लॉक डार्कजोन की अति दोहित श्रेणी में शामिल हैं, वहां पर नए नलकूप लगाने पर रोक लगाई गई है।
भूगर्भ जल स्तर को यदि बचाने में अभी भी अनदेखी की गई तो जनपद के सभी 16 ब्लॉक डार्कजोन की श्रेणी में शामिल हो सकते हैं। आने वाले समय में इसके भयावह परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।
सुरक्षित बचे चार ब्लॉक में भी लगातार गिर रहा जलस्तर
जनपद में अब 16 में से 12 ब्लॉक डार्कजोन की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। इनमें से गुलावठी, सिकंदराबाद और बुलंदशहर अतिदोहित श्रेणी में शामिल हैं।
जबकि दोहित श्रेणी में बीबीनगर, दानपुर, खुर्जा, शिकारपुर, पहासू, डिबाई और जहांगीराबाद ब्लॉक शामिल हैं। हाल ही में ब्लॉक स्याना और ऊंचागांव भी डार्कजोन में शामिल हो गए थे, लेकिन अभी तक इनको किसी श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। इस समय अनूपशहर, अरनिया, लखावटी और अगौता ब्लॉक ही सुरक्षित रह गए हैं।
क्या है डार्कजोन
डार्कजोन उस क्षेत्र को कहते हैं, जहां पर ज्यादा बोरिंग होने की वजह से भूजल स्तर बहुत नीचे गिर गया हो। ऐसे इलाकों में बोरिंग पर पाबंदी लगा दी जाती है। ज्यादा जल का दोहन होने के कारण इन इलाकों में पेयजल की समस्या पैदा हो जाती है। इस जनपद के अतिदोहित और दोहित ब्लॉकों में बोरिंग पर रोक लगाई हुई है। बावजूद इसके इन क्षेत्राें में सबमर्सिबल के बोरिंग लगातार हो रहे हैं और इन पर रोक लगाने के लिए न तो जिला प्रशासन और न ही संबंधित विभाग ने कभी कठोर कदम उठाए हैं।
भूगर्भ जल स्तर की स्थिति
जनपद के जो 12 ब्लॉक डार्कजोन में शामिल हैं। उनमें करीब तीन दशक पहले तक भूगर्भ का पानी 40 से 75 फीट नीचे हुआ करता था। लेकिन अब स्थिति यह है कि पानी 120 से 180 फीट तक नीचे पहुंच गया है। इन ब्लॉकों में साल दर साल पानी नीचे जाता रहा और अब इस समय दो फीट से अधिक पानी हर वर्ष नीचे खिसक रहा है। इसके चलते सबमर्सिबल का बोरिंग होने पर कहीं 120 फीट पर मिल जाता है तो कहीं 180 फीट पर पानी मिल रहा है।
जल संचयन को 71 स्थानों पर लगे हैं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
जल संचयन के लिए जनपद में 71 स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हुए हैं। यह सिस्टम विकास भवन, सभी ब्लॉक कार्यालयों और नगरपालिका आदि में लगे हुए हैं। लेकिन इनकी लगातार अनदेखी की जा रही है। अब मानसून सिर पर है और इनकी सफाई तक नहीं कराई गई है। वहीं, एक खास बात यह भी है कि इतने कम सिस्टम से कैसे जल संचयन किया जा सकता है। वहीं, शासनादेश है कि नए बनने वाले सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य होगा, ताकि वर्षा जल का संचयन कर भूगर्भ जल स्तर को रिचार्ज किया जा सके। ज्यादातर सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ही नहीं हैं। ऐसे सरकारी भवनों में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय आदि शामिल हैं।
जनपद के भूगर्भ जल स्तर को बचाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। तालाबों और रजवाहों की मानसून से पहले सफाई करवा दी जाएगी, ताकि जल संचयन हो सके। इसके साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को चालू करने के आदेश दे दिए हैं। डार्कजोन की अतिदोहित श्रेणी में शामिल ब्लॉकों में नए नलकूप लगाने पर रोक है। लगातार गिर रहे जल को बचाने के लिए जल्द ही जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
अभिषेक पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी।