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गोवंश आश्रय स्थलों को नहीं मिली छह माह से चारे की राशि

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गोवंश आश्रय स्थलों को नहीं मिली छह माह से चारे की राशि
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बुलंदशहर। निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों पर संरक्षित गोवंश के चारे के लिए छह माह से राशि नहीं मिल सकी है। ऐसे में अब आश्रय स्थलों के संचालन का संकट गहराने लगा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लगातार राशि की डिमांड की जा रही है। संभावना है कि जल्द ही राशि मिल जाएगी।
शासन के आदेश पर जनपद में 154 निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। जहां पर इस समय 12 हजार से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इनके लिए शासन की तरफ से चारे आदि के लिए राशि मिलती है, लेकिन गत छह माह से शासन से राशि नहीं मिली है। यह अलग बात है कि शासन ने हाल ही में गत जून माह के खर्च की 80 लाख की राशि भेजी थी, लेकिन इससे कुछ भला नहीं हुआ। अब राशि के अभाव में आश्रय केंद्रों पर चारे आदि का संकट गहराने लगा है। इसका कारण यह भी है कि अब ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो चुका है और ग्राम सचिव आश्रय केंद्रों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अफसरों का कहना है कि इस समय आश्रय केंद्रों को चलाने के लिए राशि की सबसे ज्यादा जरूरत है।
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बता दें कि जनपद में जब से आश्रय केंद्र बने हैं, तब से लेकर अब तक इनके संचालन को लेकर शासन से समय पर राशि नहीं मिली है। ऐसे में ग्राम पंचायतों के अस्तित्व में होने के कारण इनका खर्च ग्राम प्रधान आदि के जिम्मे ही रहता आया है। कार्यकाल पूरा होने के बाद जिन निर्वतमान प्रधानों से इससे पहले आश्रय स्थलों पर जो राशि खर्च की है। उसके भुगतान के लिए भी वह कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। बताया गया कि गत छह माह से राशि नहीं मिलने पर आश्रय केंद्रों पर गोवंश के चारे आदि के लिए छह करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है। इस राशि के भुगतान के खर्च करने वाले भी मिलने की आस लगाए बैठे हैं।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आरके सक्सेना ने बताया कि कई बार शासन से आश्रय केंद्रों के संचालन के लिए राशि की डिमांड की जा चुकी है। उन्होंने संभावना जताई कि शासन से जल्द ही राशि मिल जाएगी। राशि मिलने के बाद आश्रय केंद्रों के संचालन में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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