नमामि गंगे मिशन में फंड की कमी आड़े आने लगी है। गंगा किनारे बसे 30 गांवों में नए शौचालयों का निर्माण रुक गया है। पंचायत राज विभाग ने शासन से फंड की मांग की है। नमामि गंगे मिशन के तहत गंगा किनारे बसे गांवों में हर घर में शौचालयों का निर्माण होना है। विभाग के पास गांवों में शौचालय बनाने के लिए पैसा ही नहीं बचा है।
गंगा किनारे बसे 30 गांवों में 11,345 शौचालयों का निर्माण होना है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 2500 शौचालयों का निर्माण हो पाया है। हालांकि, जो शौचालय एक माह पूर्व बनने शुरू हुए थे, वहां फिलहाल निर्माण जारी है। डीपीआरओ राजेश कुमार सिंह ने बताया कि फंड की कमी के कारण नए शौचालय नहीं बन पा रहे हैं।
पुराने शौचालयों का निर्माण जारी है। शासन से पांच करोड़ रुपये की मांग की है।
दो साल से शेष राशि को भटक रहे सैकड़ों पात्र
बुलंदशहर(ब्यूरो)। सरकार की ओर से गांवों में बनाए गए शौचालयों की शेष राशि के लिए अब भी सैकड़ा पात्र भटक रहे हैं। प्रशासनिक अफसरों से शिकायत करने के बाद भी राशि नहीं मिल रही। शिकायत करने वालों में सबसे अधिक संख्या लखावठी ब्लॉक की है।
बता दें कि इस समय जिले में नमामि गंगे और भारत स्वच्छता अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों का निर्माण कार्य जारी है। शौचालय बनाने के लिए सरकार की ओर से 12 हजार की राशि दी जाती है। दो वर्ष पहले बनाए गए सैकड़ों शौचालयों की अब तक आधी राशि ही मिल पाई है। बाकी के लिए पात्र कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
लखावठी ब्लॉक की बात करें तो यहां 70 से अधिक लोगों ने प्रशासनिक अफसरों को शिकायत देकर शौचालय निर्माण की शेष राशि दिलवाने की मांग की है। इसी तरह अन्य ब्लॉकों में से भी 20 से 30 तक ऐसी शिकायतें मिल चुकी हैं। इस तरह की शिकायत जिले के 16 ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के पास भी आ चुकी हैं।
सीडीओ कार्यालय को प्राप्त हुई शिकायतों में लिखा गया है कि वह शौचालय की शेष राशि की मांग को लेकर चक्कर लगा रहे हैं।
85 समग्र गांवों मे नहीं बने आंगनबाड़ी केंद्र
शासन और प्रशासन की प्राथमिकता वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र विकास गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण नहीं हुआ है। मौजूदा वित्त वर्ष का तो पैसा ही नहीं दिया गया है। सूबे की सरकार का गठन वित्त वर्ष-2012 में होने के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र विकास योजना शुरू की गई।
योजना के तहत जनपद में वर्ष-2012 मे 22 गांव, 2013 में 29 गांव, 2014 में 29 गांव, 2015 में 29 गांव और 2016 में भी 29 गांवों का चयन किया गया। खास बात यह है कि वर्ष-2015-16 में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण गांवों में नहीं कराया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में तो आंगनबाड़ी केंद्रों का पैसा ही नहीं आया है। हाल ही में जारी हंगरी इंडेक्स में भारत 97वे पायदान पर है।