गंगा स्वच्छता को लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट इसके लिए कई बार आदेश जारी कर चुके हैं। शासन ने भी इसको गंभीरता से लिया है। इसके बावजूद गंगा साल दर साल मैली होती जा रही है।
अफसरों की मनमानी से न तो गंगा में गिर रहे नालों को रोका जा सका है और न ही गंगा आसपास के गांवों-कस्बों में सीवर लाइन बिछाई गई हैं। एसटीपी की क्षमता बेहद कम है ।
अनूपशहर मेंे गंगा घाटों पर लगाए गए एसटीपी की क्षमता बेहद कम कम हैं। अनूपशहर से चार एमएलडी गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचता है।
एक एसटीपी की क्षमता 1.75 एमएलडी और दूसरे की 0.85 एमएलडी है। कुल मिलाकर करीब 2.50 एमएलडी के दो एसटीपी हैं। गंदे पानी का बहाव अधिक होने से आए दिन गंदा पानी ओवर फ्लो होता है। इसका कहीं न कहीं असर गंगा की सेहत पर पड़ रहा है।
बता दें कि जल्द ही तीसरा एसटीपी अनूपशहर में लगना है। सीवर लाइन भी बिछाई जानी है। गंदे पानी के ओवर फ्लो की समस्या एसटीपी और सीवर लाइन बिछने से पहले खत्म नहीं होगी।
अफसरों को मैली गंगा की फिक्र नहीं
नरौरा क्षेत्र में गंदा नाला सीधे गंगा में मिल रहा है। इससे में प्रदूषण चरम पर है। मोहल्ला श्यामपुरी में साधू आश्रमों के पास स्थित गंदे नाले को बंद करने की कोशिश भी नहीं की गई है। गंदे पानी और कीचड़ का प्रवाह होने से प्रमुख बांसीघाट घाट व गांधीघाट पर गंगा स्नान तक मुश्किल हो चला है।
हालांकि नगर में एसटीपी का निर्माण कार्य चल रहा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व और नगर पंचायत के प्रभारी बृजेश कुमार कहते है कि यदि ऐसा है तो ईओ से जवाब मांगा जाएगा।
एनएमसीजी टीम ने लिया जायजा
केंद्र सरकार के नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा की टीम ने शनिवार को मदारगेट व अहारेट स्थित दोनों एसटीपी व पंपिंग स्टेशनों व नए बनाए जाने वाले एसटीपी का सघन निरीक्षण कर जानकारी हासिल की। महानिदेशक यूपीसिंह के नेतृत्व में आई टीम में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डीके मथुरिया और सलाहकार जैव विविधता डॉ.संदीप बेहरा शामिल थे।
टीम ने अहारगेट एसटीपी से शोधित पानी कम गुणवत्ता का मिलने पर नाराजगी जताई तथा एसटीपी का पानी सिंचाई के लिये किसानों को दिए जाने के निर्देश दिए।