जिला अस्पताल से चोरी हुई मशीन के मामले में अफसरों की कार्यप्रणाली ही संदेह के घेरे में आ गई है। जांच में दोषी कर्मियों पर कार्रवाई उनके लिए ईनाम मानी जा रही है तो दो कर्मियों की फाइलों को लगभग बंद कर दिया गया है।
जिला अस्पताल स्थित क्षय रोग विभाग से एमडीआर की 27 लाख रुपये की मशीन संदिग्ध तरीके से चोरी हो गई थी। मशीन चोरी होने के बाद सीएमओ के निर्देश पर नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद संदिग्ध तरीके से मशीन वापस मिल गई।
संदिग्ध तरीके से मशीन वापस मिलने से कर्मियों की भूमिका ही संदेह के घेरे में आ गई। सीएमओ द्वारा मामले की जांच कराई गई तो पांच कर्मियों की भूमिका संलिप्त मिली। एक स्वीपर को तत्काल निलंबित कर दिया गया, जबकि दो कर्मियों के खिलाफ अफसरों ने फजीहत झेलने के बाद तबादले की कार्रवाई की गई।
जिन कर्मियों के तबादले जिन स्थानों पर किए गए, वह उनके घरों के काफी नजदीक थे। एक कर्मी का खुर्जा तबादला किया गया, जो खुर्जा का ही रहने वाला था और दूसरे कर्मी का अनूपशहर तबादला किया गया, जो वहां से महज तीन किमी की दूरी पर स्थित एक गांव का रहने वाला था।
बताया गया कि दोनों कर्मी काफी पहले से ही तबादले के प्रयास में थे। अफसरों ने दोनों पर कार्रवाई का रूप दिखाते हुए उन्हें मनमाफिक जगह भेज दिया। वहीं, दो बाकी कर्मियों की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पूरे मामले में टीबी विभाग के एक अफसर की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
किसी भी दोषी कर्मी को छोड़ा नहीं जाएगा। सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले पर जिला क्षय रोग अधिकारी से रिपोर्ट तलब की गई है। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ