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गड़रिया मुठभेड़ : दो पिस्टलों के साथ शहर में घूम रहा था विनोद

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जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद मृतक बदमाश विनोद के परिजन व ग्राम प्रधान। संवाद
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बुलंदशहर। एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में ढेर हुआ मुजफ्फरनगर पुलिस का एक लाख का इनामी डकैत विनोद गड़रिया दो पिस्टलों को साथ में लेकर घूम रहा था। उसकी मौत के बाद पुलिस ने उसके पास से दो पिस्टल, 20 कारतूस और छह खोखा कारतूस बरामद किए हैं।
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जिससे साफ है कि आरोपी ने एसटीएफ पर करीब छह राउंड फायरिंग की। उसकी पिस्टल से निकली एक गोली एसटीएफ को लीड कर रहे उपनिरीक्षक केशव शांडिल्य की बुलेट प्रूफ जैकेट में जा धंसी। जिसमें वह बाल-बाल बचे और दो एसटीएफ के सिपाही इस दौरान घायल हो गए हैं।
एसटीएफ टीम को लीड कर रहे नोएडा यूनिट के उपनिरीक्षक केशव शांडिल्य ने बताया कि शुक्रवार देर शाम उन्हें सूचना मिली थी कि मुजफ्फरनगर पुलिस का एक लाख का एक इनामी बदमाश बुलंदशहर क्षेत्र में किसी डकैती की योजना को अंजाम देने की फिराक में है। वह अनूपशहर रोड पर किसी स्थान पर अपने साथियों संग मिलने वाला है।
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जिसके बाद टीम ने अनूपशहर रोड पर ग्याराहवां मील पुलिस चौकी के पास चेकिंग अभियान शुरू कर दिया। जब एक बाइक पर सवार दो लोगों को रुकने का इशारा किया तो आरोपी बदरखा रोड पर बाइक मोड़कर भागने का प्रयास करने लगे। एसटीएफ ने जब पीछा किया तो आरोपियों ने टीम पर फायरिंग कर दी।
जिसमें एक गोली टीम लीडर उपनिरीक्षक केशव शांडिल्य की बुलेटप्रूफ जैकेट में जा गली। जबकि, दो सिपाही अनुज व सुमित घायल हो गए। जिसके बाद एसटीएफ ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आरोपियों की घेराबंदी करते हुए फायरिंग की। जिसमें एक गोली लगने से एक बदमाश वहीं गिर गया। जबकि, दूसरा बदमाश बाइक छोड़कर वहां से अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकला। मृतक बदमाश की शिनाख्त विनोद गड़रिया निवासी गांव इस्सोपुर खुरगान, थाना कैराना जनपद शामली के रुप में हुई। पुलिस ने जब आरोपी के पास से मिले एक बैग व शव की तलाशी ली तो उसके पास दो पिस्टल व भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए हैं।
वह बुलंदशहर में किसी बड़ी डकैती की योजना को देने की फिराक में था। अब पुलिस उसके साथी व बुलंदशहर में वारदात को अंजाम देने के लिए मिलने वाले अन्य बदमाशों की तलाश में जुट गई है। वहीं, देर रात एसएसपी दिनेश कुमार सिंह, एसपी देहात व एसपी एसटीएफ नोएडा ने मौके का दौरा किया।
मृतक के भाईयों ने आने से किया इन्कार, पोस्टमार्टम के बाद चाचा ले गए शव : शनिवार को विनोद का शव लेने चाचा प्रीतम निवासी गांव बरसत जिला करनाल (हरियाणा) के साथ कुछ लोग पोस्टमार्टम हाऊस पहुंचे। यहां प्रीतम ने बताया कि विनोद पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था। करीब 20 साल पहले उसकी आपराधिक प्रवृत्ति को देखते हुए परिजनों ने संपर्क खत्म कर दिया था। पिता सीताराम की वर्ष 2000 में मृत्यु हो गई थी। शनिवार सुबह पुलिस द्वारा विनोद के एनकाउंटर में मारे जाने की सूचना दी गई। इसके बाद उनके द्वारा पानीपत में रहने वाले विनोद के भाई प्रमोद और अन्य से संपर्क किया गया।
भाइयों ने शव लाने के लिए बुलंदशहर आने से इन्कार कर दिया, जिसके चलते उन्हें ही यहां आना पड़ा। करीब 23 साल पहले विनोद ने अपनी पत्नी की भी हत्या कर दी थी। उस वक्त विनोद के पुत्र की उम्र करीब दो माह थी, जिसका उसकी दादी और चाचा ने पालन-पोषण किया है। अब पुत्र गौतम द्वारा ही अपने पिता विनोद के शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जिसने पाला-पोसा, उसके ही घर में डाली डकैती
विनोद के एनकाउंटर की सूचना पर उसके गांव इस्सोपुर खुरगान के वर्तमान प्रधान असलम अपने कुछ साथियों के साथ बुलंदशहर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। यहां प्रधान ने बताया कि विनोद के परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी। विनोद को उनके द्वारा पाला-पोसा गया था, उसके पिता भी उनके यहां काम करते थे। लेकिन, विनोद ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनके घर में ही डकैती की वारदात को अंजाम दिया। वर्तमान में यह मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। अक्सर विनोद की तलाश में पुलिस टीमें गांव आती रहती हैं।
मुजफ्फरनगर के छह से अधिक मामलों में था वांछित : विनोद मुजफ्फरनगर से डकैती और हत्या के 6 से अधिक केस में 2024 से वांछित चल रहा है और इस पर एक लाख का इनाम भी घोषित था। विनोद 2006 से जरायम की दुनिया में अपराध के लिए कुख्यात रहा है और इस पर डकैती के साथ हत्या और लूट के 40 से अधिक केस शामली, बागपत और हरिद्वार जिलों में दर्ज हैं।
गैंग के सदस्य न इस्तेमाल करते फोन, ना कोई और गैजेट : इस संबंध में जब कुछ पुलिसकर्मियों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि विनोद पत्नी की हत्या के बाद फरारी काटते हुए शातिर गैंगस्टर मुनव्वर उर्फ मन्ना, सादाब और फुरकान समेत अन्य के संपर्क में आया और डकैती डालने लगा। बाद में इसने अपना एक गैंग बनाया और यह गैंग फोन व अन्य गैजेट इस्तेमाल नहीं करता था। अधिकतर यह लोग आपस में मुलाकात करके ही एक दूसरे से संपर्क बनाकर वारदातों को अंजाम देते थे।
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