पर्यटकों को लुभाएंगे सौ साल पुराने चार विरासत वृक्ष
बुलंदशहर। जिले में सौ साल पुराने चार विरासत वृक्ष गंगा तटों पर आने वाले पयर्टकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे। गंगा तटों पर स्थित इन वृक्षों को विरासत की श्रेणी में शामिल करने के लिए जैव विविधता बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया है।
महाभारत कालीन धरोहर के साथ ही जनपद स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कई एतिहासिक धरोहर संजोए हुए है। गंगा किनारे वाला क्षेत्र महाभारत काल से भी जुड़ा माना जाता है। इस क्षेत्र में आज भी कई ऐसे धार्मिक स्थल और स्थान हैं, जहां पर कई विरासत मौजूद हैं। इसी क्षेत्र में चार ऐसे वृक्ष हैं जो सैकड़ों साल पुराने हैं। इन पेड़ों को विरासत घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन पेड़ों की पहचान कर वन विभाग ने इसकी सूची जैव विविधता बोर्ड को भेज दी है। वन विभाग इनकी उम्र सैकड़ों साल पुरानी मान रहा है। शासन ऐसे पेड़ों को विरासत घोषित कर रहा है। यह वृक्ष विरासत घोषित होंगे तो वन विभाग इनका संरक्षण करेगा और इनको बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
इन पेड़ों पर दर्ज होगा इतिहास
जिन चार वृक्षों का नाम विरासत की श्रेणी में शामिल करने के लिए भेजा गया है उनमें डिबाई क्षेत्र के रामघाट बांगर स्थित बरगद, ऊंचागांव क्षेत्र में मांडू घाट आश्रम के पास गांव मवई स्थित बरगद, अहार क्षेत्र स्थित अवंतिका देवी मंदिर के पास स्थित पीपल और इसी मंदिर के पास से एक खिरनी का पेड़ शामिल है। अफसरों का कहना है कि इन पेड़ों के पास शिलापट पर इनका इतिहास, उम्र आदि जरूरी बातें भी अंकित की जाएंगी।
शासन ने सौ साल से अधिक वाले पेड़ों को विरासत घोषित करने का निर्णय लिया है। जनपद में ऐसे चार पेड़ चिन्हित कर उनकी सूची राज्य जैव विविधता बोर्ड को भेज दी है। संभावना है कि बोर्ड की ओर से इन वृक्षों को जल्द ही विरासत घोषित कर दिया जाएगा।
गौतम सिंह, डीएफओ, बुलंदशहर