परिजनों के खर्चे से युवती को बरामद करने गई पुलिस, चार सस्पेंड
बुलंदशहर। संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई युवती की तलाश करने परिजनों के खर्चे पर बंगलूरू जाना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। मामले की शिकायत मिलने पर आईजी के निर्देश पर हुई पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। इसके बाद एसएसपी ने एक दरोगा, एक महिला सिपाही समेत तीन सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया।
खुर्जा नगर कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी युवती करीब एक माह पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं लग सका था। इसके बाद परिजनों ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस जांच पड़ताल में जुटी तो युवती की अंतिम लोकेशन बंगलूरू की निकली। इस पर जांच कर रहे दरोगा जफर, सिपाही बलवीर और श्याम ने युवती के परिजनों से संपर्क किया। बरामदगी के लिए बंगलूरू आने-जाने का खर्चा उठाने को कहा। तीनों पुलिसकर्मियों ने अपने साथ एक महिला सिपाही राधिका को ले लिया। चारों के आने-जाने का एयर टिकट, खाना-पीना और रहने की व्यवस्था भी परिजनों के खर्चे पर की गई। करीब चार से पांच दिन बंगलूरू में रहने के बाद सभी पुलिसकर्मी खाली हाथ वापस लौट आए।
करीब एक सप्ताह पहले परिजनों ने आईजी प्रवीण कुमार से इसकी शिकायत कर दी। इसके बाद आईजी के निर्देश पर एसएसपी ने सीओ खुर्जा को मामले की जांच सौंपी। जांच में सामने आया कि आरोपी पुलिसकर्मी बिना अनुमति के ही युवती की बरामदगी के लिए बंगलूरू गए। इस पूरे टूर का खर्चा पीड़ित परिजनों ने ही किया। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने दरोगा जफर, सिपाही राधिका, बलवीर व श्याम को सस्पेंड कर दिया है।
विवेचना में परिजनों का ही अधिक होता है खर्चा
विवेचना में दबिश के नाम पर खर्चा पीड़ित पक्ष का होने का यह पहला मामला नहीं है। अधिकतर मामलों में पुलिस दबिश के नाम पर पीड़ित पक्ष से ही खर्चा कराती है। जिससे पीड़ित पक्ष पर अतिरिक्त भार पड़ता है। अधिकतर मामले फाइलों में दब जाते हैं। यह मामला आईजी तक पहुंचा तो सबके सामने आ गया।
चारों पुलिसकर्मी युवती की बरामदगी के लिए परिजनों के खर्चे पर व बिना अनुमति के बंगलूरू गए। जांच में दोषी पाए जाने पर चारों को सस्पेंड कर दिया गया है। - श्लोक कुमार, एसएसपी