2017 में सूबे में सत्ता हासिल करने के लिए राजनीतिक दल राजनीति की बिसात पर कामयाब चाल चलने के लिए बेताब हैं। हालांकि, जिले में उम्मीदवार चयन की शुरुआती जंग में क्षेत्रीय दलों (सपा और बसपा) ने राष्ट्रीय दलों (कांग्रेस और भाजपा) को पछाड़ दिया है।
राष्ट्रीय दल कार्यकर्ताओं के दबाव के बीच चुनाव लड़ने वाली अपनी फौज के सैनिकों (उम्मीदवारों) के नाम फाइनल करने में असहज महसूस कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नाम के एलान और कांग्रेस गठबंधन के इंतजार में है।
जिले में सात विधानसभा क्षेत्र हैं। बसपा और सपा छह-छह सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान कर चुकी है। सपा की स्याना और बसपा की डिबाई सीट पर अभी उम्मीदवारों के नाम घोषित होना बाकी है। वहीं, भाजपा आलाकमान के पास दावेदारों के नाम तो पहुंच गए हैं, लेकिन उन पर फाइनल मुहर लगने में पेंच फंस रहा है।
सारा काम नए प्रदेशाध्यक्ष के आने की प्रतीक्षा में रूका है। कई माह से नए प्रदेशाध्यक्ष का नाम ही घोषित नहीं हो पा रहा है। इसलिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा अभी अटकी है। मजे की बात यह है कि जिलाध्यक्ष के नाम भी अभी तक यहां भाजपा फाइनल नहीं कर सकी है।
सूबे में रसातल में पहुंच चुकी कांग्रेस के सामने गंठबंधन की मजबूरी है। वह रालोद से गठबंधन फाइनल करने के साथ सीटो का बंटवारा तय करेगी। रालोद अभी जेडीयू आदि छोटे दलों के साथ एक दल बनाने में व्यस्त है। इसलिए अभी कांग्रेस से सीटों के बंटवारे और गंठबंधन पर फाइनल बात नहीं हो रही है।
हालांकि कांग्रेस ने सातों सीट से अपने दावेदारों की लिस्ट तैयार ली है। कांग्रेस के जिले में स्याना और खुर्जा से दो विधायक हैं। जिले में कांग्रेस खुद को मजबूत मानती है। वहीं, रालोद के प्रदेश महामंत्री संगठन डॉ. राजकुमार सांगवान ने बताया कि पार्टी का जेडीयू आदि छोडे़ दलों से गठबंधन लगभग तय है।अब घोषणा होनी बाकी है। जल्द सूबे में बड़ी ताकत के साथ हम सामने होंगे।