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एक साथ जली पिता-पुत्री की चिता: सांड से बाइक टकराने से गई पापा की जान, सदमे में बेटी के भी छुट गए प्राण

Mon, 23 Mar 2026 10:53 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, नरौरा/बुलंदशहर

सार

जब लक्ष्मी नारायण का शव गांव लाया गया तो वहां हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांव की परंपरा और घर के भारी माहौल को देखते हुए परिजनों ने निर्णय लिया कि दोनों शवों को अलग-अलग समय पर अंतिम विदाई दी जाए। पिता का शव पहुंचने से ठीक पहले ममता की अंतिम यात्रा निकाली गई। बाद में लक्ष्मी नारायण की अर्थी उठी। 
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पिता-पुत्री की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के बुलंदशहर स्थित नरौरा थाना क्षेत्र में बेलोन टोल प्लाजा के निकट रविवार रात सांड़ से बाइक टकराने से रामघाट निवासी पूर्व ग्राम प्रधान के पति लक्ष्मी नारायण की मृत्यु हो गई। मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची तो उनकी 17 वर्षीय बेटी सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसने भी दम तोड़ दिया। सोमवार को जब एक ही आंगन से पिता और पुत्री की अर्थियां उठीं तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। रामघाट के गंगा तट पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

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लक्ष्मी नारायण कॉलेज में थे चौकीदार
रामघाट निवासी लक्ष्मी नारायण रावल (55) डिबाई स्थित मथुरिया इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात थे। वर्तमान में वह कॉलेज परिसर में ही चौकीदार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी पत्नी कृष्णा देवी रामघाट की पूर्व ग्राम प्रधान रह चुकी हैं, जिसके चलते परिवार का क्षेत्र में काफी सम्मान था। रविवार देर शाम लक्ष्मी नारायण ड्यूटी पर जाने के लिए घर से बाइक से निकले थे।

हाईवे पर सांड से टकरा गई थी बाइक
रात करीब साढ़े 9 बजे जब वह नरौरा थाना क्षेत्र के बेलोन टोल प्लाजा के समीप नेशनल हाईवे पर पहुंचे, तभी अचानक सड़क के बीचों-बीच सांड़ आ गया। बाइक की रफ्तार तेज होने के कारण लक्ष्मी नारायण उसे नियंत्रित नहीं कर सके और जबरदस्त भिड़ंत हो गई।टक्कर इतनी भीषण थी कि वह उछलकर सड़क पर दूर जा गिरे, जिससे उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।

परिवार में मचा कोहराम
हादसे के बाद मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। लहूलुहान हालत में उन्हें तुरंत पास के एनएपीएस चिकित्सालय ले जाया गया। वहां देर रात करीब 11 बजे उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव की शिनाख्त की और परिजनों को सूचना दी। जैसे ही खबर रामघाट स्थित उनके निवास पर पहुंची तो वहां कोहराम मच गया।
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श्मशान घाट पर उमड़ा जनसैलाब 
पोस्टमार्टम के बाद जब लक्ष्मी नारायण का शव गांव लाया गया तो वहां हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांव की परंपरा और घर के भारी माहौल को देखते हुए परिजनों ने निर्णय लिया कि दोनों शवों को अलग-अलग समय पर अंतिम विदाई दी जाए। पिता का शव पहुंचने से ठीक पहले ममता की अंतिम यात्रा निकाली गई। बाद में लक्ष्मी नारायण की अर्थी उठी। रामघाट के गंगा तट पर एक ओर पिता की चिता सजी थी और दूसरी ओर उनकी लाडली बेटी की। छोटे पुत्र ललित रावल (18) ने पहले बहन ममता को और फिर पिता लक्ष्मी नारायण को मुखाग्नि दी।
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