संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। जिले में लगातार बढ़ रहे आई फ्लू के मरीजों के कारण जिला अस्पताल से लेकर सभी सरकारी अस्पतालों में आंखों के आपरेशन बंद कर दिए हैं। इससे मरीजों की परेशानियां बढ़ गई हैं। एक रुपये के पर्चे पर होने वाले आपरेशन के लिए लोगों को अब 15 से 35 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। वर्तमान की स्थिति में जिले के जिला अस्पताल से लेकर सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब दो हजार से अधिक आई फ्लू के मरीज पहुंच रहे हैं। आई फ्लू की स्थिति न बिगड़े और मरीजों को ओपीडी में उपचार मिल सके इसके लिए आपरेशन की व्यवस्था बंद की गई है।
इन दिनों जिलेभर में आई फ्लू फैला हुआ है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में प्रतिदिन सरकारी चिकित्सालयों की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ लग रही है। आई फ्लू से पीड़ित सर्वाधिक मरीज जिला अस्पताल के नेत्र विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या होने के बाद उन्हें ओपीडी में चिकित्सक व ऑप्ट्रोमेटिस्ट न मिलने पर सीएमओ से शिकायत की गई। मरीजों की समस्या को संज्ञान में लेकर सीएमओ ने ऑपरेशन की सुविधा को फिलहाल कुछ दिनों के लिए बंद करवा दिया है। इससे आई फ्लू से पीड़ित मरीजों को उपचार दिया जा सके। ऐसे में जिला अस्पताल व 100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई के नेत्र विभाग के ऑपरेशन कक्ष पर पिछले दिनों से ताला लटका हुआ है।
जिला अस्पताल और डिबाई में होते हैं निशुल्क ऑपरेशन
आंखों के ऑपरेशन की सुविधा जिले में सिर्फ दो सरकारी चिकित्सालयों में हैं। जिला अस्पताल में तीन दिन पूर्व प्रतिदिन 25 से अधिक ऑपरेशन किए जा रहे थे। जबकि डिबाई चिकित्सालय में प्रतिदिन 30 से अधिक ऑपरेशन होते हैं। वहीं, सिकंदराबाद संयुक्त चिकित्सालय में आंखों के ऑपरेशन की सुविधा इसी सप्ताह से शुरू होनी थी। इस प्रक्रिया को अब आई फ्लू के चलते स्थगित कर दिया गया है। स्वास्थ्य अफसरों के अनुसार आंखों के ऑपरेशन के लिए कोई इमरजेंसी नहीं होती है। मरीज कभी भी अपना ऑपरेशन करवा सकता है। इन दिनों मौसम में नमी-उमस व आई फ्लू बढ़ने को लेकर ऑपरेशन की प्रक्रिया रोकी गई है। इससे मरीजों में इंफैक्शन न फैले और आई फ्लू के मरीजों को इलाज मिल सके।
निजी अस्पताल में 15 से 35 हजार में होता है ऑपरेशन
आंखों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन सरकारी चिकित्सालय में महज एक रुपये के पर्चे पर निशुल्क होता है। जबकि निजी में इसके लिए मरीजों को 15 से 35 हजार रुपये तक देने पड़ते हैं। नेत्र सर्जन डॉ. अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि ऑपरेशन की प्रक्रिया और लैंस की अलग-अलग वैरायटी होने के कारण निजी अस्पतालों में 15 से 37 हजार रुपये तक की फीस ली जाती है।