मौसम की बेरुखी, सूखे का संकट, बिजली संकट और ऊपर से नहरें भी खाली। किसानों पर हर तरफ से फसलों की सिंचाई का संकट गहरा गया है। नहरों में पानी न आने से फसलें सूखने का डर है। जबकि भूजल स्तर गिर जाने से भी नलकूप जवाब दे चुके हैं।
पानी की कमी के कारण टिहरी डेम से यूपी को पानी रोके जाने और सिल्ट सफाई के कारण नहरें सूखी पड़ी हुई हैं। जनपद के बड़े कृषि हिस्से की सिंचाई नहरों से होती है। जनपद का कुल सिंचाई का क्षेत्रफल 300399 हैक्टेयर है।
इसमें नलकूप के माध्यम से 267558 हैक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई होती है। इसके अलावा नहरों से 26117 हैक्टेयर कृषि क्षेत्रफल और कुऐं से 6615 हैक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है।
इस समय अधिकांश फसलों को पानी की जरूरत है, लेकिन मौसम की बेरुखी और बढ़ते बिजली संकट के बीच नहरों के सूख जाने से किसान पर दोहरी मार पड़ रही है। फसलों के सूखने का खतरा बढ़ गया है।
इन क्षेत्रों में सबसे अधिक है नहरों से सिंचाईः वैसे तो जनपद के अधिकांश हिस्सों में नहरों से सिंचाई की जाती है, लेकिन सबसे अधिक सिकंदराबाद, बुलंदशहर, जहांगीराबाद, खुर्जा, अरनिया, पहासू, डिबाई और अनूपशहर का क्षेत्र है।
सिकंदराबाद में 2470 हेक्टेयर, बुलंदशहर में 2600 हैक्टेयर, खुर्जा में 2442 हैक्टेयर, जहांगीराबाद में 2223 हैक्टेयर, अरनिया में 3462 हैक्टेयर, पहासू में 2784 हैक्टेयर, डिबाई में 4421 और अनूपशहर में 2529 हैक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई नहरों से होती है।