नरौरा। परमाणु ऊर्जा संयंत्र नरौरा में किसी आकस्मिक रेडिएशन इमरजेंसी की स्थिति में त्वरित बचाव, नियंत्रण और राहत कार्यों की दक्षता जांचने के लिए शनिवार को ऑफ साइट इमरजेंसी मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस पूर्वाभ्यास में जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और विभिन्न सरकारी विभागों की टीमों ने भागीदारी की। संयंत्र के निकटवर्ती तीन गांवों गंगागढ़, महाराजपुर और रतुआ नगला को प्रभावित क्षेत्र मानकर यह अभ्यास किया गया।
पूर्वाभ्यास की शुरुआत सुबह सात बजे तब हुई जब परमाणु ऊर्जा संयंत्र में स्थिति अनियंत्रित होने की कल्पना की गई। संयंत्र निदेशक एसके कावरे ने आंतरिक रूप से साइट इमरजेंसी घोषित करते हुए तत्काल जिलाधिकारी को सूचना दी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है।
जिलाधिकारी ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए, हवा के रुख का आकलन किया और सुबह लगभग साढ़े सात बजे रामघाट थाना क्षेत्र के गांव महाराजपुर, रतुआ नगला व गंगागढ़ को आधिकारिक तौर पर प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया। इसके बाद इस ओर जाने वाले यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल सक्रिय हो गया।
टीमों ने संभाला मोर्चा, युद्धस्तर पर काम शुरू :
इमरजेंसी घोषित होते ही, आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियां अपने-अपने कार्यों में जुट गईं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, सिविल डिफेंस, स्वास्थ्य विभाग, रसद और परिवहन विभाग की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ सक्रिय हो गईं। गांवों में स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें पहुंचीं।
उन्होंने ग्रामीणों को आकस्मिक स्थिति में क्या करें और क्या न करें की जानकारी दी। ग्रामीणों के बीच आयोडीन की गोलियां भी वितरित की गईं।
स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को विकिरण आपातकाल के दौरान घरों में बंद रहने, आयोडीन की गोलियां खाने, बाहर होने पर हवा के विपरीत दिशा में चलने और प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी।
नरौरा क्षेत्र के ग्राम महाराजपुर में ग्रामीणों को जानकारी देती टीम। संवाद