50 वॉच टावरों से होगी डॉल्फिन और घड़ियालों की निगरानी
बुलंदशहर। गंगा नदी की शान बन चुकीं डॉल्फिन और घड़ियालों की जल्द ही वॉच टावर से निगरानी की जाएगी। इसके लिए गढ़ से लेकर नरौरा तक रामसर साइट में 50 से अधिक वॉच टॉवर बनाए जाएंगे। एक-एक किलोमीटर के अंतराल पर टॉवर लगाए जाएंगे। ऐसा होने पर लोग डॉल्फिन और घड़ियाल का दीदार कर सकेंगे। शासन की ओर से मांगी गई रिपोर्ट पर विभाग ने प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। इस कार्य पर लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
गंगा में इस समय बड़ी संख्या में डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुआ आदि जलीय जीव हैं। इनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अब तक कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। डॉल्फिन और घड़ियाल एक ऐसे जलीय जीव हैं, जिनकी संख्या बहुत कम रह गई है। डॉल्फिन के साथ घड़ियाल की सुरक्षा के लिए शासन ने डॉल्फिन कंजर्वेशन प्लान के तहत प्रस्ताव मांगा है, जिसे वन विभाग ने बनाकर भेज दिया है। इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद गंगा किनारे वॉच टॉवर बनाए जाएंगे। यहां से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही लोगों को भी डॉल्फिन व घड़ियाल आदि जलीय जीवों का दीदार करने में आसानी होगी।
गंगा में 39 डॉल्फिन और 250 से अधिक हैं घड़ियाल
बिजनौर से लेकर नरौरा तक गंगा में करीब 39 डाल्फिन और 250 से अधिक घड़ियाल हैं। समय-समय पर इनकी गिनती भी की जाती है, ताकि यह पता लग सके कि इनकी संख्या कितनी बढ़ या घट गई है। डीएफओ के अनुसार पिछले दिनों डॉल्फिन की गिनती के लिए सर्वे किया गया था। यह कार्य डब्लूडब्लूएफ की ओर से किया गया। इसमें विभाग ने भी मदद की थी। डीएफओ ने बताया कि इस सर्वे की रिपोर्ट डब्लूडब्लूएफ जल्द ही जारी करेगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि गंगा में अब इस समय कितनी डॉल्फिन मौजूद हैं।
गढ़ से नरौरा तक का हिस्सा है रामसर साइट
जिले में गंगा स्याना क्षेत्र से प्रवेश होकर नरौरा बैराज से आगे बदायूं जिले में प्रवेश कर जाती है। गढ़ से लेकर नरौरा बैराज तक के हिस्से को रामसर साइट के नाम से जाना जाता है। इसी क्षेत्र में सबसे अधिक डॉल्फिन हैं। ऐसे में इस क्षेत्र पर वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ के अलावा अन्य विभागों की नजर रहती है।
वॉच टावर बनने से शिकारियों पर भी रखी जाएगी नजर
विभागीय अधिकारियों के अनुसार गंगा नदी में शिकारी भी मछली आदि पकड़ने के लिए आते रहते हैं। हालांकि इन पर नजर रहती है और बावजूद इसके डॉल्फिन व घड़ियाल का शिकार होने का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में वॉच टावर बनने के बाद इन पर पैनी नजर रखी जा सके गी।
विभाग को होगी आमदनी
डीएफओ के अनुसार वॉच टावर बनने के बाद लोगों को भी डॉल्फिन और घड़ियाल आदि गंगा के जलीय जीवों का दीदार करने में आसानी होगी। इससे विभाग को भी आमदनी होगी। जो भी वॉच टावर से इनका दीदार करेगा, उसके लिए उसे टिकट लेना होगा। इस पर विभाग की ओर से विचार-विमर्श किया जा रहा है।
शासन को रिपोर्ट भेजकर धनराशि मांगी गई है। संभावना है कि इस साल के पूरा होने से पहले ही इस पर मोहर लग जाए। जैसे ही स्वीकृति और राशि मिलेगी, वॉच टॉवर लगवाने का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
- विनीता सिंह, डीएफओ।