वाच टॉवर से गंगा में डॉल्फिन पर रखी जाएगी नजर
बुलंदशहर। गंगा नदी की शान बन चुकीं डॉल्फिन पर अब वाच टॉवर से नजर रखी जाएगी। इसके लिए बुलंदशहर, हापुड़ और मेरठ क्षेत्र में गंगा किनारे वाच टॉवर लगाए जाएंगे। वन विभाग की ओर से इस कार्य के लिए डॉल्फिन कंजर्वेशन प्लान के तहत प्रस्ताव भेजा गया है।
डीएफओ विनीता सिंह के अनुसार गंगा में विचरण कर रही डॉल्फिन की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई ऐसे खास इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। यह एक ऐसा जलीय जीव है, जिनकी संख्या बहुत कम रह गई है। इसे बचाने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। ताकि इनकी सुरक्षा चाक-चौबंद हो और इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। गंगा में कभी-कभार ही डॉल्फिन का दीदार होता है। डॉल्फिन की सुरक्षा के लिए शासन ने डॉल्फिन कंजर्वेशन प्लान के तहत प्रस्ताव मांगा था, जिसे बनाकर भेज दिया है। इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद गंगा किनारे वाच टॉवर बनाए जाएंगे। यहां से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही लोगों को भी डॉल्फिन का दीदार करने में आसानी होगी। यह व्यवस्था होने के बाद गंगा में जाल डालने वालों पर भी कड़ी नजर रहेगी। डॉल्फिन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मोटर बोट और अन्य जरूरी उपकरण भी खरीदे जाएंगे।
गंगा में 39 डॉल्फिन कर रहीं विचरण
बिजनौर से लेकर नरौरा तक गंगा में करीब 35 डाल्फिन बताई जा रही हैं। समय-समय पर इनकी गिनती भी की जाती है, ताकि यह पता लग सके कि इनकी संख्या कितनी बढ़ गई है। डीएफओ के अनुसार पिछले दिनों इनकी गिनती के लिए सर्वे किया गया था। यह कार्य वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ की ओर से किया गया। डीएफओ ने बताया कि इस सर्वे की रिपोर्ट डब्लूडब्लूएफ दिल्ली में करेगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि गंगा में अब इस समय कितनी डॉल्फिन मौजूद हैं।
गढ़ से नरौरा तक का हिस्सा है रामसर साइट
जिले में गंगा स्याना क्षेत्र से प्रवेश होकर नरौरा बैराज से आगे बदायूं जिले में प्रवेश कर जाती है। इसमें डॉल्फिन के अलावा घड़ियाल और कछुआ के अलावा अन्य जलीय जीवों की भी कमी नहीं है। गढ़ से लेकर नरौरा बैराज तक के हिस्से को रामसर साइड के नाम से जाना जाता है। इसी क्षेत्र में सबसे अधिक डॉल्फिन बताई जा रही है। ऐसे में इस क्षेत्र पर वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ के अलावा अन्य विभागों की पैनी नजर रहती है।