बुलंदशहर। यूरिया की कालाबाजारी का खेल काफी लंबे समय से चल रहा है, लेकिन कार्रवाई अब जाकर हुई है। डीएम श्रुति ने एक साल पहले ही हेराफेरी पकड़ ली थी। पत्र भी लिखा था, लेकिन लखनऊ तक बैठे अधिकारी टस से मस नहीं हुए थे।
जिले की तत्कालीन जिलाधिकारी श्रुति ने 02 जून 2025 को एनएच-91 पर ग्राम ज्वारखेड़ा स्थित पीसीएफ के बफर गोदाम का औचक निरीक्षण किया था। इसके बाद उन्होंने 4 जून 2025 को प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश को-आपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड लखनऊ को पत्र लिखा।
इस पत्र में उन्होंने लिखा था कि 02 जून को किए गए निरीक्षण के समय गोदाम पर उर्वरक वितरण किए जाने संबंधी पंजिका एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, यह स्थिति आपत्तिजनक है। ऐसी स्थिति में विभागीय अभिलेखों में हेरफेर होने की प्रबल संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
डीएम ने पत्र में उल्लेख किया था कि स्टॉक रजिस्टर के कॉलम सही से भरे हुए नहीं पाए गए। पीसीएफ ने अपने कर्तव्यों का सही प्रकार निर्वहन भी नहीं किया। पंजिका में कोई भी सही रिकार्ड उपलब्ध नहीं पाया गया, जिससे स्पष्ट हो सके कि पीसीएफ गोदाम को कितना उर्वरक प्राप्त हुआ है। उसके सापेक्ष संबंधित समितियों और संस्थाओं को कितना उर्वरक वितरित किया गया है।
उन्होंने रिपोर्ट में लिखा था कि भंडार नायक द्वारा सचिव साधन सहकारी समितियों से निजी उत्कोच के रूप में धनराशि की मांग की जाती है। धनराशि मिलने के बाद ही उर्वरक को साधन सहकारी समितियों पर भेजा जाता है। धनराशि नहीं देने पर उर्वरक देने से मना कर दिया जाता है। उन्होंने लिखा था कि इससे शासन की मंशा के अनुरूप समय से किसानों को उर्वरक प्राप्त नहीं हो पा रहा है। इससे फसलों पर प्रभाव पड़ने के कारण जन सामान्य में विभाग की छवि धूमिल भी होती है।
डीएम ने अपने पत्र में उस समय साफ लिखा था कि पीसीएफ के जिला प्रबंधक दिव्यांशु वर्मा और भंडार नायक हरेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ उचित कार्रवाई किया जाना अपेक्षित है। डीएम के पत्र लिखने के लगभग एक साल बाद अब 10 मई को जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने संभल की सीमा से यूरिया की कालाबाजारी करने वाले तीन ट्रकों को पकड़ा था। उसमें से 1575 सरकारी यूरिया के कट्टे बरामद हुए थे। जांच आगे बढ़ी तो पीसीएफ के दो भंडार नायक, हरेंद्र प्रताप सिंह, रावेंद्र और लेखाकार यश राघव, जिला प्रबंधक पीसीएफ दिव्यांशु वर्मा व चार तस्कर मोहम्मद हारुन, असलम, शेरअली, सौपाल सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई।
मेरठ में बैठा एक अधिकारी है मास्टर माइंड :
विभागीय अधिकारियों की जांच में जो तथ्य आ रहे हैं, उसमें आरोपियों को बचाने वाले अधिकारी मेरठ में बैठा है। सूत्रों का कहना है कि तत्कालीन जिलाधिकारी के पत्र लिखने के बाद करीब एक साल तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, उसमें उक्त अधिकारी का बड़ा हाथ है।
छह हजार कट्टे बिना रिकार्ड के पहुंचे
आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता उत्तर प्रदेश ने जो पत्र प्रदेश के सभी सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता को जारी किए पत्र में यूरिया के कट्टे गायब होने की बात लिखी है। उन्होंने बताया कि वीडियो कांफ्रेंस के दौरान बुलंदशहर के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक ने बताया है कि यूरिया के छह हजार कट्टे बिना जिलाधिकारी की कमेटी से आवंटन कराए सीधे रैक प्वाइंट से अन्य किसी केंद्र पर भेज दिए गए हैं। आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता उत्तर प्रदेश ने लिखा कि यह आपत्तिजनक है और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
प्रभारी व अकाउंटेंट की तलाश तेज
अनूपशहर। यूरिया की कालाबाजारी में फरार चल रहे नामजद पीसीएफ गोदाम प्रभारी हरेंद्र पाल सिंह और अकाउंटेंट यश राघव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दबिश जारी है। सीओ विकास प्रताप चौहान ने बताया कि इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पांच टीमें लगाई गई हैं। इसमें स्वाट, एसओजी और सर्विलांस सेल भी शामिल है। मुख्य तस्कर हारुन सहित चार को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। बुधवार को गिरफ्तार भंडार नायक रावेंद्र को बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया है। अकाउंटेंट और प्रभारी की गिरफ्तारी के बाद कई और बड़े चेहरों से नकाब उतरना तय माना जा रहा है।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अमित त्यागी का कहना है कि बिना आरओ के ही यूरिया के कट्टे भेज दिए गए। जो नियम के अनुसार गलत है। पैसा भी बाद में लिया गया जो पहले लेना चाहिए था। इसमें जो भी आरोपी होंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ के अधिकारियों को भी लिखकर भेज दिया है।