सत्ता परिवर्तन के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी डगमगाने लगी है। बृहस्पतिवार देर रात जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ सदस्यों का एक खेमा अविश्वास प्रस्ताव को लेकर डीएम से मिला। विपक्षी सदस्यों ने डीएम को ज्ञापन देकर अध्यक्ष से दोबारा विश्वास मत हासिल करने की मांग की।
इसके बाद जिला पंचायत परिषद की सियासत एक बार फिर से गरमा गई है। अमर उजाला ने इस संबंध में पहले ही खुलासा कर दिया था।सपा सरकार में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर हरेंद्र यादव निर्विरोध चुने गए थे।
इसके बाद विधानसभा चुनाव से पहले हरेंद्र यादव अपनी पत्नी जिला पंचायत सदस्य आशा यादव के साथ राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए।उनकी पत्नी सिकंदराबाद विधानसभा से रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ी, लेकिन वह हार गईं।
अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही जिला पंचायत की कुर्सी को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है। हरेंद्र यादव को जिला पंचायत की कुर्सी से हटाने के लिए विरोधी खेमा सक्रिय हो गया है। बृहस्पतिवार को जिला पंचायत सदस्य सुनील चरौरा के नेतृत्व में 36 सदस्यों ने जिलाधिकारी को जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के क्रम में शपथ पत्र सौंपे।
सुनील चरौरा के नेतृत्व में सदस्यों ने दिए ज्ञापन में कहा है कि हम सभी जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रति अविश्वास मत रखते हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा समर्थन हासिल करना होगा। अविश्वास प्रस्ताव जारी होते ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर सियासत गरमा गई है।
भाजपा के दिग्गज नेताओं ने जिला पंचायत की कुर्सी पर नजरें गढ़ा दी हैं। भाजपा के दिग्गज अपने समर्थन में लाबिंग करने जुट गए हैं। डीएम के मिलने वालों में भाजपा के जिलाध्यक्ष हिमांशु मित्तल, पिंटू प्रमुख, लक्ष्मण सैनी, चंदकेश बघेल, टीटू प्रधान, धर्म सिंह पोल आदि मौजूद रहे।