योगी सरकार की प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने के अभियान को अफसरों ने ही पलीता लगा दिया। अफसरों को जिले की सड़कों पर बने गड्ढों की लंबाई-चौड़ाई और गहराई का विवरण भेजना था, लेकिन आंकड़ों की बाजीगरी दिखाने के फेर में भरपूर बजट के लिए पूरी की पूरी सड़क नापकर उसका स्टीमेट बनाकर शासन को भेज दी।
हालांकि, कुछ अफसरों ने अपने जिलों के गड्ढों की सही रिपोर्ट भेजी है। दरअसल, लक्ष्य के हिसाब से पीडब्ल्यूडी को 698 किमी. सड़कों को गड्ढा मुक्त कराना था। बुलंदशहर और खुर्जा विकास प्राधिकरण, आरईएस, मंडी, पीएमजेएसवाई, सिंचाई, गन्ना जिला पंचायत को भी अपने अधीन सड़कों को गड्ढा मुक्त करना था।
अभियान शुरू करने से पहले बाकायदा शासन ने हर निर्माण विभाग से ऐसी सड़कों का विवरण मांगा था। इसके तहत अफसरों को गड्ढों की लंबाई-चौड़ाई और गहराई की डिटेल शासन को भेजनी थी, लेकिन उसकी जगह अफसरों ने पूरी सड़क की नापतौल कर रिपोर्ट बनाकर भेज दी।
इसके बाद शासन ने यह कह दिया कि अफसर गड्ढा मुक्ति का खर्च विभागीय संसाधनों से जुटाकर खर्च करें। ऐसे में वह अफसर फंस गए जो बजट के इंतजार में थे। हालांकि, कई विभाग ऐसे भी हैं, जिन्होंने सही विवरण शासन को भेजी। सिकंदराबाद ईओ ने गड्ढों की लंबाई-चौड़ाई और गहराई मापकर महज 250 मीटर गड्ढा मुक्ति की रिपोर्ट शासन को भेजी।
विभागों ने की खानापूर्ति ः विभागों को पर्याप्त फंड नहीं मिलने के कारण गड्ढा मुक्ति की आड़ में खानापूर्ति की गई। गड्ढों को बेहद खराब तरीके से भरा गया है। गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़कें को गड्ढा मुक्त ही नहीं हो सकी।