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नरौरा नगर पंचायत में मिली गड़बडि़यां

Sat, 24 Sep 2016 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
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जांच - फोटो : ब्यूरो
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नरौरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर है। डीएम के आदेश पर एडीएम द्वारा की गई प्राथमिक जांच में कई बड़ी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच अंजाम तक पहुंची तो भ्रष्टाचार के दल दल में फंसे अफसर और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है।
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डीएम आंजनेय कुमार के आदेश पर एडीएम वित्त एवं  राजस्व ने नरौरा नगर पंचायत का निरीक्षण किया था। एडीएम बृजेश कुमार ने बताया कि सफाई का ठेका मार्च में हो जाना चाहिए था। चेयरमैन द्वारा पत्रावली दबाने के कारण नगर की सफाई का ठेका अब तक नहीं हो सका है। चेयरमैन ने पार्किंग का ठेका छोड़ा, मगर अनुबंध नहीं किया।

अनुबंध किए बगैर पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। राज्य वित्त की पत्रावली भी गायब थी। इस कारण पुस्ता निर्माण गंगा घाट का 28 लाख रुपये का पेमेंट नहीं किया गया। चेक रजिस्टर की जांच करने पर पता चला कि जिस चेक का विवरण रजिस्टर में दर्ज किया गया, उससे पेमेंट ही नहीं हुआ।
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निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने सेप्टिक टैंक को साफ करने वाली मशीन को गायब करने का आरोप भी चेयरमैन पर लगाया। मौके पर मशीन भी नहीं मिली। हालांकि नगर पंचायत के कर्मचारियों ने मशीन को छह माह पूर्व ठीक कराने के लिए भेजने की बात कही है।

 एडीएम ने बताया कि नगर पंचायत बोर्ड ने प्रस्ताव पास कर चपरासी को बाबू बना दिया। इतना ही नहीं चपरासी से बाबू बनाए गए कर्मचारी को प्रभारी इओ का चार्ज देकर चेकों पर साइन करा लिए गए। नियम के मुताबिक प्रमोशन और ग्रेड परिवर्तन सचिवालय से होता है।

एडीएम का कहना है कि पत्रावली मंगा ली गई हैं।जांच की जा रही है। जिम्मेदार अफसरों कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। चेयरपर्सन उमेश कुमारी वशिष्ठ का कहना है कि आरोप गलत हैं। तत्कालीन ईओ और बाबू के कारण कुछ खामियां रह गई हैं, अब उनको ठीक कराया जा रहा है। किसी भी चपरासी को बाबू नहीं बनाया गया है। 
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