बुलंदशहर के सिकंदराबाद थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की मनमानी और भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी मेरठ रेंज ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को डीआईजी ने सिकंदराबाद थाना प्रभारी नीरज मलिक और चौकी प्रभारी जेल समेत कुल सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। यह कार्रवाई क्षेत्राधिकारी (सीओ) सिकंदराबाद की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें पुलिसकर्मियों पर लगे अवैध वसूली और प्रताड़ना के आरोप प्रारंभिक रूप से सही पाए गए हैं।
डीआईजी कार्यालय से बताया गया कि सिकंदराबाद क्षेत्र के एक निवासी ने गत एक मई को डीआईजी मेरठ रेंज को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा था। पीड़ित का आरोप था कि थाना प्रभारी नीरज मलिक, उपनिरीक्षक अरुण कुमार, आरक्षी योगेश और चार-पांच अन्य पुलिसकर्मियों ने उसे अकारण परेशान किया। पीड़ित ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पुलिसकर्मी उसे जबरन थाने ले गए और वहां छोड़ने के बदले पैसों की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों के साथ जांच की गुहार लगाई थी। डीआईजी ने संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी सिकंदराबाद, भास्कर मिश्रा को तत्काल जांच के निर्देश दिए थे।
सीओ की प्रारंभिक जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई और शिकायतकर्ता के आरोपों में सत्यता मिली। रिपोर्ट मिलते ही डीआईजी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पूरी टीम पर सख्त कार्रवाई की है। डीआईजी के निर्देश पर एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज मलिक, वरिष्ठ उपनिरीक्षक अरुण कुमार, उपनिरीक्षक अमित कुमार (चौकी प्रभारी जेल), मुख्य आरक्षी योगेश कुमार, आरक्षी प्रवेश बैसला, आरक्षी सुमित और आरक्षी विपुल कुमार को लाइन हाजिर कर दिया गया है। साथ ही डीआईजी मेरठ रेंज ने एसएसपी बुलंदशहर को निर्देशित किया है कि इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच के आधार पर दोषियों के विरुद्ध निलंबन और विभागीय कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।