...तो भाड़े के शूटरों ने दिया था धनौरा कांड को अंजाम
ककोड़। धनौरा कांड में आरोपी बनाए गए हमलावरों को पुलिस 24 घंटे बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। इस घटना के दूसरे दिन भी गांव में सन्नाटा रहा। गांव में कार पर गोली बरसाकर संदीप की हत्या करने और उसके पिता धर्मपाल, गनर विश्वेंद्र को घायल करने के मामले में आरोपी बनाए गए चार लोगों में दो पहले से ही जेल में बंद हैं। गांव निवासी अन्य दो आरोपियों को घटना की साजिश रचने का आरोपी बनाया गया है। पीड़ित के परिजनों का कहना है कि जेल से ही घटना की पटकथा लिखी गई और भाड़े के शूटरों से हत्या को अंजाम दिलाया गया है।
रविवार को धर्मपाल, संदीप, रविंद्री, गनर विश्वेन्द्र खेत से कार में चारा लेकर लौट रहे थे। सुबह करीब 9.15 बजे जब वह बुलंदशहर जेवर मार्ग से अपने घर को जाने वाली गली में मुड़ने लगे तो सामने खड़े दो लोगों ने कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। कार को पीछे करने का प्रयास किया तो पीछे खड़े 6-7 शूटरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। फायरिंग में संदीप, धर्मपाल, गनर विश्वेन्द्र और पास में खड़े पवन पुत्र इंद्रपाल को गोली लगी। गोली लगने से संदीप, धर्मपाल और गनर गंभीर रूप से घायल हो गए। उपचार के दौरान संदीप की मौत हो गई। उसके पिता, गनर की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। आरोप है कि घटना को कारित कराने में जेल में बंद अमित जाट व उसके पिता राजेंद्र जाट ने षड्यंत्र रचा। षड्यंत्र में गांव निवासी हरेंद्र, देवेंद्र जाट भी शामिल हैं। धर्मपाल के परिजनों ने बताया कि चारों साजिशकर्ताओं ने भाड़े के शूटरों को भेजकर घटना को अंजाम दिलाया है। वहीं, दूसरी ओर प्रकरण में सात अज्ञात और दो अन्य नामजद आरोपी फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने की बात कह रही है।
समय के साथ बदलता रहा खूनी खेल का सरगना
सिकंदराबाद। होली पर्व पर 31 साल पहले धनौरा में दो पक्षों के बीच खूनी रंजिश का खेल शुरू होने के बाद से ही समय के साथ नेतृत्व भी बदलता रहा। सरगना के जेल जाने, गोली का शिकार होने के बाद दूसरा सरगना कमान संभाल लेता था।
1990 में धनौरा में जब दो पक्षों में खूनी रंजिश का खेल शुरू हुआ तो एक पक्ष का सरगना कालीचरण तो दूसरे पक्ष का इंद्र कर रहा था। कालीचरण की बढ़ती उम्र के कारण उसका बेटा जगपाल उर्फ बराती ने कमान संभाल ली। वही इंद्र की मौत के बाद नरेंद्र फौजी ने इंद्र पक्ष को संभाला। नरेंद्र फौजी की मौत के बाद बागडोर राजेंद्र ने संभाला वहीं जगपाल की मौत के बाद कालीचरण पक्ष की कमान जगपाल के भाई धर्मपाल ने संभाल ली। राजेंद्र को आजीवन कारावास की सजा के चलते जिला कारागार में बंद होने के कारण अब उसके पक्ष की कमान उसका पुत्र अमित संभाल रहा है। अमित भी फिलहाल जिला कारागार में बंद है। एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने घटना को लेकर दिए गए बयान में अमित की भूमिका का उल्लेख किया है।
कड़ी सुरक्षा में संदीप का किया गया अंतिम संस्कार
ककोड़। धनौरा गोलीकांड में मारे गए संदीप का रविवार की रात करीब 11 बजे कड़ी सुरक्षा में अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस अफसरों के अलावा भारी पुलिस बल तैनात रहा। पोस्टमार्टम के बाद रात करीब 9.30 बजे संदीप का शव गांव पहुंचा। गांव में तनाव को देखते हुए पहले से ही मौके पर भारी पुलिसबल की तैनाती की गई थी। पुलिस के आला अफसर कई थानों की पुलिस फोर्स के अलावा अतिरिक्त पुलिसबल के साथ रविवार की शाम से ही गांव में कैंप किए हुए थे। संदीप के घर के अलावा, शमशान, गांव में भारी पुलिसबल की तैनाती की गई थी। रात करीब 11 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच संदीप का अंतिम संस्कार किया गया।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की गईं हैं, जो विभिन्न स्थानों पर दबिश दे रही हैं। घटना के संबंध में पुलिस को सुराग मिल चुके हैं। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया जाएगा।
संतोष कुमार सिंह, एसएसपी