खुर्जा में आयोजित भागवत कथा सुनाते आचार्य वेद प्रकाश भारद्वाज। संवाद
खुर्जा। जंक्शन मार्ग स्थित गोपी कृष्ण विहार मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को सती और ध्रुव चरित्र की कथा का वर्णन किया। कथा व्यास आचार्य वेद प्रकाश भारद्वाज ने बताया कि माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर योगाग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया।
सती का चरित्र पतिव्रता धर्म, निष्ठा और स्वाभिमान का आदर्श उदाहरण है। इसके बाद धुव चरित्र सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि सौतेली माता सुरुचि के तिरस्कार से व्यथित होकर पांच वर्ष के बालक ध्रुव ने वन में जाकर कठोर तप किया। भगवान नारायण ने प्रसन्न होकर उन्हें अचल पद का वरदान दिया।