रेप की धमकियों से घर से निकलने में लगता था डर
इससे पहले निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट मामले में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर शुक्रवार को दिनभर गहमागहमी रही। इस मामले में पीड़िता निशु आजाद, उनके पिता संजय आजाद, आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास, आशुतोष रांका और वकील ऋषभ रंजन ने मीडिया से बात की और पुलिस से हुई बातचीत की जानकारी दी।
सीजेपी कार्यकर्ता निशु आजाद ने कहा कि पिछले कई दिनों से आरोपी के समर्थक उन्हें गालियां दे रहे थे और रेप की धमकियां दे रहे थे। निशु ने कहा कि सच बताऊं तो इतने दिनों से जो लोग मुझे गालियां दे रहे थे और रेप की धमकियां दे रहे थे। मैंने उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है। अब उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है और मुझे उम्मीद है कि पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि इन धमकियों की वजह से उनकी जिंदगी पर गहरा असर पड़ा है। जिस तरह से ये लोग मुझे गालियां दे रहे थे, रेप की धमकियां दे रहे थे और मेरे अश्लील स्टिकर बना रहे थे, उसकी वजह से मुझे घर से बाहर निकलने में भी शर्म आ रही थी। इस घटना की वजह से डर के चलते मैं दो-तीन हफ्ते कॉलेज नहीं गई। और अब जब जाती हूं तो लगता है कि सब मुझे जज कर रहे हैं, बहुत बुरा लगता है। मुझे उम्मीद है कि पुलिस अब कार्रवाई करेगी ताकि मुझे ये सब और न सहना पड़े। अब तक पुलिस जवाब नहीं दे रही थी लेकिन अब दे रही है। तो उम्मीद है कि पुलिस इसी तरह कार्रवाई भी करेगी।
72 घंटे में दिया था गिरफ्तारी का आश्वासन
निशु के पिता संजय आजाद ने जानकारी दी थी कि दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में कानूनी धाराओं को शामिल करने की हमारी मांग मान ली है। पुलिस ने हमें 72 घंटे का समय दिया है। हमें विश्वास है कि 72 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हमें दिल्ली पुलिस और संविधान पर पूरा भरोसा है।
'गुंडे घूम रहे हैं'
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि 72 घंटे के अंदर, हमें पूरा भरोसा है। जो आश्वासन उन्होंने दिया है, हमें भरोसा है कि दिल्ली पुलिस जिसे पूरे देश में एक प्रमुख एजेंसी माना जाता है, वह अपनी प्रतिबद्धता को निभाएगी। जो गुंडे घूम रहे हैं, देश में और देश की राजधानी में इतने खुलेआम घूम रहे हैं, उन्हें इस तरह खुलेआम घूमने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को रद्द कर दिया है। इस समय, अगर आपने दिल्ली पुलिस का हलफनामा पढ़ा है, तो उन्होंने कहा था कि 2,800 हिस्ट्रीशीटर, दुर्दांत अपराधियों की जांच कर उन्हें जेल में डालने की जरूरत है। तो हमने भी कहा, उन्हें जेल में डालो, हमने वो शर्त मान ली। तो क्या स्वतंत्र भारद्वाज जैसे ये गुंडे वे जंतर-मंतर पर आए, क्या दिल्ली पुलिस ने उस समय उनकी पहचान नहीं की? और जब वह आया तो धमकी देते हुए आया, वह निशु को धमकी दे रहा था, और जब वह जंतर-मंतर आया तो उसने वहां इतना जघन्य अपराध किया, हत्या का प्रयास किया। उसके बाद, एफआईआर दर्ज होने के बाद भी दिल्ली पुलिस अभी भी उसे बचा रही है और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। क्या वह उन 2,800 दुर्दांत अपराधियों में से एक नहीं है? तो दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट में एक बात कहती है और यहां बिल्कुल अलग कार्रवाई करती है।
'यह लोकतंत्र और कानून के राज के लिए खतरा'
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्होंने इसे प्रोसेस किया है। हम भी कानूनी प्रक्रिया को समझते हैं। उन्होंने कहा कि शाम तक हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे और पूरा करेंगे। आप शाम को चेक कर सकते हैं, और अगर नहीं हुआ तो आप हमसे सवाल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संजय आजाद को 2.5 इंच की दो चोटें आई हैं, सिर में दो अलग-अलग चोटें। ऐसा क्यों हुआ? मुझे यहां क्यों आना पड़ा? इन सभी लोगों को क्यों आना पड़ा? जनता में इतना आक्रोश क्यों दिखा? कहीं न कहीं लगता है कि इसमें मिलीभगत है। जिनके नाम आ रहे हैं, क्या उनकी जांच नहीं हुई? क्या उन्होंने आरोपी को छुड़ाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को फोन किया? उनके काम की भी जांच होनी चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह मैं हूं या कोई और। कोई भी कानून से ऊपर या नीचे नहीं है। अगर किसी के अपराध को उसकी ताकत के आधार पर माफ कर दिया जाता है, तो यह लोकतंत्र और कानून के राज के लिए खतरा है।