मैना-मौजपुर गांव में डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर के विरोध में धरने पर बैठे किसान।
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डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर का खुर्जा-सिकंदराबाद के बीच निर्माण शुरू नहीं होने से रेल मंत्रालय पर हर रोज 56 हजार रुपये की पेनाल्टी लगाई जा रही है। चार माह में 67 लाख रुपये का जुर्माना रेलवे पर लग चुका है।
प्रशासन को अब तक सिकंदराबाद और खुर्जा क्षेत्र में जमीन पर कब्जा नहीं मिला है। नतीजतन, डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अनुबंध की शर्त के मुताबिक चार माह पहले निर्माण कार्य शुरू हो जाना चाहिए था। मगर अब तक प्रोजेक्ट पर काम ही शुरू नहीं हो पाया है।
कार्य में देरी के चलते रेल मंत्रालय पर हर रोज 56 हजार रुपये की पेनाल्टी ठाकी जा रही है। नियम के तहत हर रोज प्रति किमी 2000 रुपये पेनाल्टी लगाने की व्यवस्था है। बुलंदशहर में डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर की लंबाई 28 किमी है। दो हजार रुपये के हिसाब से हर रोज 56 हजार रुपये का आर्थिक बोझ रेल मंत्रालय को उठाना पड़ा रहा है।
56 हजार रुपये हर रोज के हिसाब से चार माह में रेल मंत्रालय पर 67 लाख रुपये की पेनाल्टी ठोंकी जा चुकी है। रेलवे के असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर ने डीएम को मामले से अवगत करा दिया है, इसके बावजूद जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया गया है।
एडीएम (प्रशासन) अरविंद कुमार मिश्र ने बताया कि जमीन पर कब्जा नहीं मिलने से प्रोजेक्ट में देरी जरूर हुई है। एक सप्ताह के भीतर प्रोजेक्ट पर काम शुरू करवा दिया जाएगा।
दो माह से धरने पर बैठे हें किसान
वाजिब मुआवजे की मांग को लेकर चोला क्षेत्र के किसान दो माह से धरने पर बैठे हुए हैं। न तो किसानों का मुआवजा बढ़ाया गया और न ही रेलवे को जमीन पर कब्जा ही दिलवाया गया। ऐसे में रेलवे के अफसर तो परेशान हैं ही, साथ ही किसानों को भी रात ठंड में गुजारनी पड़ रही है। किसान करीब तीन महीने से मैना-मौजपुर गांव में धरने पर बैठे हुए हैं।