जहांगीराबाद। नगर के बुध पैठ स्थित दरगाह हजरत इज्जत शाह बाबा का 19वां सालाना उर्स शरीफ अकीदत, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहजीब के माहौल में बड़े ही शानो-शौकत के साथ मनाया गया। उर्स मुबारक में नगर समेत दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी तादाद में जायरीन पहुंचे।
दरगाह पर चादरपोशी कर मुल्क में अमन-ओ-सुकून, खुशहाली और तरक्की की दुआएं मांगीं। उर्स शरीफ के मौके पर आयोजित शानदार कव्वाली महफिल में कव्वाल खलील साबरी और उनकी टीम ने सूफियाना कलाम, मनकबत और गजलें पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। देर रात तक चली महफिल में जायरीन झूमते नजर आए।
उर्स का आगाज समाजसेवी व मानव एकता ट्रस्ट के अध्यक्ष अज्जू पठान ने फीता काटकर किया। इस मौके पर दरगाह के सज्जादा नशीन सूफी आस मोहम्मद ने मेहमानों का दस्तारबंदी कर इस्तकबाल किया। कार्यक्रम में दीन और समाज से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। खलील साबरी ने अपनी गजल के दौरान जब यह शेर पढ़ा कि तेरी मौजूदगी दुनिया कौन देखेगा, तुझे मेले में सब देखेंगे तो मेला कौन देखेगा तो महफिल में मौजूद अकीदतमंदों ने खूब दाद दी।
कव्वालों ने हजरत इज्जत शाह बाबा की शान में कलाम पेश कर समा बांध दिया। उर्स के दौरान विशाल लंगर व भंडारे का भी आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों जायरीन ने तबर्रुक हासिल किया। इंतजामिया कमेटी के सदस्य जायरीन की खिदमत में पूरी तन्मयता से जुटे रहे।
मुख्य अतिथि अज्जू पठान ने कहा कि हजरत इज्जत शाह बाबा की दरगाह मोहब्बत, इंसानियत और हिन्दू-मुस्लिम एकता की बेहतरीन मिसाल है। यहां हर मजहब और तबके के लोग अकीदत के साथ हाजिरी देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे रूहानी आयोजन समाज में भाईचारे, सौहार्द और इंसानियत का पैगाम फैलाने का काम करते हैं।
उर्स के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। देर रात तक दरगाह पर जायरीन की आमद जारी रही। इस मौके पर सभासद सुल्तान अंसारी, पूर्व सभासद नईम अंसारी, इंतजार अली, मंसूर अली, अल्ताफ खां, डॉ. माजिद समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
जहांगीराबाद में कव्वाली पेश करते मशहूर कव्वाल खलील साबरी और उनकी टीम। संवाद