सोशल ट्रेड के माध्यम से लाखों लोगों से ठगी करने में भूमिका निभाने वाले एजेंटों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ जाल बिछा रही है। इसके लिए साइबर एक्सपर्ट की भी मदद ली जा रही है। जिले की करीब 15 हजार से ज्यादा आईडी पर साइबर सेल की नजर है।
बता दें कि एसटीएफ ने जैसे ही फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया, एजेंटों में अफरातफरी मच गई। मामले की जांच में साइबर एक्सपर्ट्स की भी मदद ली जा रही है। सोशल ट्रेड घोटाले के आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है।
जिले की 15 हजार से ज्यादा आईडी की साइबर सेल जांच कर रही है। अब एजेंटों को भी हवालात की हवा खानी पड़ सकती है। विभिन्न थानों में दर्ज हो रहे मुकदमों की जांच भी एसटीएफ स्तर से ही की जाएगी।
कैसे मिले पैसा लोग परेशान
ठगी के शिकार लोगों के सामने अब बड़ा सवाल है कि उनका डूबा पैसा कैसे उन्हें मिले। जिन एजेंटों और गारंटरों ने लोगों को फंसाया, वह भूमिगत हैं। कुछ गारंटर और एजेंट खुद के भी लुटने का हवाला देकर पीछा छुड़ा रहे हैं। ठगी का शिकार लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर वह क्या करें।
रिमांड पर आरोपियों से मिले महत्वपूर्ण सुराग
एबलेज इन्फो सोल्यूशन के मालिक अनुभव मित्तल, सीईओ श्रीधर प्रसाद और तकनीकी प्रमुख महेश दयाल गुरुवार सुबह करीब 11 बजे रिमांड पर एसटीएफ कार्यालय पहुंचे। आरोपियों को रिमांड पर लेने के बाद बृहस्पतिवार को दिनभर इनसे अलग-अलग पूछताछ चलती रही। इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं।
वहीं, एसटीएफ को ईमेल आईडी ह्म्द्गश्चशह्म्ह्लद्घह्म्ड्डह्वस्रञ्चह्वश्चह्यह्लद्घ.ष्शद्व पर अब तक 9000 से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। आईजी क्राइम भगवान स्वरूप श्रीवास्तव आरोपियों से पूछताछ के बाद बृहस्पतिवार शाम को लखनऊ लौट गए। वहीं, एसआईटी का नेतृत्व कर रहे डीआईजी मेरठ केएस एमैनुअल बृहस्पतिवार दोपहर एसटीएफ कार्यालय पहुंचे।
आरोपियों से पूछताछ करने के लिए पूरी एसआईटी एसटीएफ कार्यालय पर मौजूद रही। आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके 3726 करोड़ रुपये के बिजनेस का हिसाब जानने का प्रयास किया गया। आरोपियों से सोशल ट्रेड के बिजनेस मॉडल को भी समझने का प्रयास किया गया।
एसटीएफ ने आरोपियों से अन्य बैंकों में खातों, धोखाधड़ी की रकम को कहां-कहां निवेश किया गया और उनके साथ कितने लोग शामिल हैं जैसी पूछताछ की गई।