मम्मी पापा मुझे बचाओ... वरना ये लोग मुझे मार देंगे। पापा मम्मी आप जल्दी आ जाओ, मुझे यहां नहीं रहना। ये लोग बहुत बुरे हैं। मैं यहां नहीं रह सकता। आप मुझे प्यार करते हैं तो मुझे यहां नहीं छोड़ेंगे। कुछ यही शब्द राहुल ने आरोपियों के चंगुल से छूटकर हॉस्टल के फोन से अपने मामा पिता को बोले।
अपने रोते हुए बेटे की आवाज सुनकर मां-बाप का कलेजा फट गया। वह पल भर में अपने बेटे से मिलना चाहते थे। लेकिन ऐसा संभव नहीं था। बुलंदशहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी राहुल(बदला हुआ नाम) के पिता ने फोन पर बताया कि उन्होंने 15 दिन पहले ही अपने सबसे छोटे बेटे को डीपीएस बुलंदशहर से निकालकर डीपीएस नोएडा में 11वीं कक्षा में प्रवेश कराया था।
4-5 मई को स्कूल के शरारती बच्चों ने उसके साथ अभद्रता की। जिससे बेटे का ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं। सूचना पर पहुंचे तो वह इलाज कराने के लिए घर ले आए। सोमवार से कक्षाएं चलने के चलते रविवार दोपहर राहुल को हॉस्टल में छोड़ आए। छोड़ते समय राहुल हॉस्टल में डर महसूस कर रहा था।
लेकिन हम लोग उस डर को नहीं देख पाए। राहुल के पिता ने बताया कि सोमवार रात जब राहुल पढ़ाई करने के बाद हॉस्टल के हॉल में पहुंचा तो लोहे की रॉड और डंडे लेकर बैठे आरोपियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। बचाने आए दोस्त को भी आरोपियों ने नहीं बख्शा।
किसी तरह राहुल ने हॉस्टल के फोन से फोन कर रोते हुए जानकारी दी। राहुल के पिता का आरोप है कि जब वह सोमवार रात हॉस्टल पहुंचे तो वार्डन ने जानकारी नहीं दी और गुमराह किया। चौकीदार से जानकारी ली तो उसने बताया कि यहां कैलाश हॉस्पिटल की एंबुलेंस आई थी और दो बच्चों को लेकर गई है।
जब कैलाश हॉस्पिटल पहुंचे तो एक बैड पर राहुल और दूसरी पर उसका दोस्त लेटा हुआ था। बेटे को देखकर मा-बाप की आंखें भर आईं। राहुल अपनी मां के सीने से लगकर रो पड़ा। राहुल ने मां से कहा कि मां मुझे अब यहां नहीं रहना। राहुल के पिता ने बताया कि राहुल के सिर और पैर में चोट लगी है। उसकी जांचें होनी हैं।