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पुलिस के गले में सीबीआई का ‘फंदा’

Sat, 13 Aug 2016 12:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
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गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री के अल्टीमेटम पर 24 घंटे में हाईवे पर मां-बेटी से गैंगरेप की वारदात का खुलासा करने वाले पुलिस अधिकारियों की गर्दन फंस गई है। उनके खुलासे में झोल पर आला अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को विवेचना सौंपे जाने पर अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
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सीबीआई वारदात की विवेचना के साथ-साथ पुलिस के अधिकारियों की जांच की भी पड़ताल करेगी। 29 जुलाई की रात एनएच-91 पर मां-बेटी के साथ हुए गैंगरेप और लूट की वारदात के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले पर संज्ञान लेते हुए बड़ी कार्रवाई की थी।

मुख्यमंत्री ने एसएसपी वैभव कृष्ण, एसपी सिटी राममोहन सिंह, सीओ सिटी हिमांशु गौरव को सस्पेंड कर दिया था। इन तीन बड़े अधिकारियों समेत पुलिस के करीब 10 कर्मी सस्पेंड किए गए थे। मुख्यमंत्री ने पुलिस के अधिकारियों को वारदात के खुलासे के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।
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मुख्यमंत्री के दरबार में पुलिस के अधिकारियों ने बिना सवालों के जवाब दिए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में नौ अगस्त को मुख्य आरोपी समेत तीन और बदमाश पकड़े गए। छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस का खुलासा किसी के गले नहीं उतर रहा है।

हाईकोर्ट द्वारा मामले की विवेचना सीबीआई को सौंपे जाने के बाद खुलासा करने वाले अधिकारियों पर भी जांच का शिकंजा कस सकता है।

बावरिया नहीं, कन्नौज का फकीर है सलीम
बुलंदशहर(ब्यूरो)। हाईवे पर मां-बेटी से हुए गैंगरेप में गिरफ्तार सलीम दरअसल बावरिया जाति का है ही नहीं। सरकारी अभिलेखों की जांच में वह बावरिया की उपजाति छैमार का न होकर फकीर जाति का निकला। यही नहीं उसके साथ पकड़े गए उसके दो साथी भी बावरिया जाति के नहीं हैं। तीनों ने आपस में सिर्फ परिचित हैं इनका आपराधिक रिकार्ड भी नहीं मिला है।

29 जुलाई की रात कोतवाली एनएच-91 पर मां-बेटी से गैंगरेप में पुलिस दो बार में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है जबकि एक अभी भी फरार है। पहले गिरफ्तार रईस, शावेज और जबर सिंह का भी बावरिया गैंग से लिंक नहीं मिला। सरकारी अभिलेखों के मुताबिक रईस मेवाती है, जबर सिंह जाटव और शाबेज मुस्लिम है। तीनों आसपास के जिले के रहने वाले निकले।

वहीं नौ अगस्त को सलीम बावरिया के साथ परवेज और जुबैर को गिरफ्तार कर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया। सरकारी अभिलेखों और कन्नौज से मिली जानकारी के मुताबिक, सलीम और उसके दो साथी फकीर जाति से हैं जबकि नौ अगस्त को नोएडा में आईजी मेरठ जोन सुजीत पांडेय ने प्रेस वार्ता के दौरान सलीम को बावरिया की उपजाति छैमार का बताया था।

सलीम उर्फ बीना उर्फ दीवानजी पुत्र रियासत, परवेज उर्फ जुबेर उर्फ सुनील पुत्र आकिल और साजिद पुत्र वहीद निवासी गांव तिलवारी इनौरा थाना तिरवा जिला कन्नौज है।  पुलिस ने सलीम, परवेज और जुबेर में तो कनेक्शन बता लिया, लेकिन तीन अन्य साथियों का लिंक पुलिस नहीं जोड़ पाई है।   बावरिया जाति में नहीं है कोई सलीम बावरिया
प्रकरण में पुलिस द्वारा लिए जा रहे बावरिया गिरोह के नाम पर बावरिया जाति के लोगों ने हरियाणा में पंचायत की। पंचायत में कहा गया कि बावरिया हिंदू होते हैं। वे मुस्लिम नाम नहीं रखते। बावरिया जाति के सरपंचों ने कहा कि उनकी जाति को बिना वजह बदनाम किया जा रहा है। बावरियाओं में सलीम बावरिया नाम का कोई व्यक्ति नहीं है।

लड़की बरामद करने में लगा सलीम पहुंचा जेल
29 जुलाई को हाईवे पर मां-बेटी से हुए गैंगरेप में  पुलिस ने जिस सलीम को गिरफ्तार कर जेल भेजा है वह अपने परिचित की बेटी को बरामद करने में लगा हुआ था। सलीम से जुड़े लोगों की मानें तो सलीम के परिचित की बेटी अपने प्रेमी संग भाग गई थी।

सलीम अपने साथी परवेज और साजिद के साथ मिलकर उसे मेरठ में तलाश कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक, इसी बीच पुलिस ने झांसे में लिया और सलीम को गिरफ्तार कर लिया। सलीम के जरिए ही परवेज और साजिद को बुला लिया। इसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पांच साल से सहारनपुर की जेल में है फाती
 आईजी ने वारदात में शामिल बावरिया गिरोह के तीन बदमाशों को गिरफ्तार करने का दावा किया है, जिनमें परवेज भी शामिल है। परवेज उर्फ फाती नाम का बावरिया गिरोह का सदस्य पांच साल से सहारनपुर की जेल में बंद है।

उसे वर्ष 2011 में डीएम आवास के पास एक ही परिवार के पांच सदस्यों की लोहे की रॉड से पीटकर की गई हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर आईजी किस फाती की बात कही थी?

रिमांड खत्म, जेल भेजे गए जबर और शावेज
गैंगरेप के दो आरोपियों से रिमांड पर पुलिस कुछ भी नहीं उगलवा पाई। रिमांड अवधि समाप्त होने पर  पुलिस ने दोनों को वापस जेल भेज दिया। हालांकि पुलिस अहम जानकारियां मिलने का दावा कर रही है। पुलिस की एक टीम मंगलवार सुबह 9 बजे दोनों को जेल से रिमांड पर लेकर आई थी।

पुलिसकर्मियों का कटेगा एक-एक दिन का वेतन
हाईवे पर हैवानियत की शिकार पीड़ित मां-बिटिया को पुलिस की तरफ से भी मुआवजा दिया जाएगा। आईजी सुजीत पांडेय के निर्देश पर पुलिस विभाग जनपद के हर पुलिस अफसर और पुलिसकर्मियों के वेतन से एक-एक दिन का वेतन काटकर पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर देगा। यह  करीब 20 लाख रुपये होगा।

250 मुखबिरों को बांटे आठ लाख रुपये
बुलंदशहर। हाईवे के हैवानों को दबोचने के लिए पुलिस को पानी की तरह पैसा बहाना पड़ा।  यूपी, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश में पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने करीब 250 मुखबिरों को आठ लाख से ज्यादा रुपये बांट दिए।
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