शूट आउट एट पुलिस लाइन प्रकरण में पुलिस ही जांच में रोड़ा बनी हुई है। पुलिस की लापरवाही से मजिस्ट्रेटी जांच पूरी नहीं हो पा रही है। मजिस्ट्रेट को पुलिस के सहयोग के लिए बार-बार पत्र जारी करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस अफसर बयान दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं पहुंच रहे हैं। जिसके चलते मजिस्ट्रेटी जांच अटकी हुई है।
बता दें कि 22 अगस्त 2016 की रात क्वार्टर गार्द के संतरी सौरभ त्यागी ने पुलिस लाइन के गणना मुंशी मनोज यादव की सरकारी राइफल से गोली मारकर हत्या कर दी थी। बीच-बचाव में आए एचसीपी चंद्रपाल और मनवीर को भी गोली मारकर घायल कर दिया था।
दोनों को गोली मारने के बाद पुलिस लाइन के ग्राउंड में सौरभ ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस लाइन में तैनात एसआई ब्रजपाल सिंह ने तहरीर देकर एफआईआर दर्ज कराई थी। जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने एडीएम वित्त को मजिस्ट्रियल जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
तब से एडीएम वित्त केस की जांच कर रहे हैं। एडीएम वित्त अरविंद कुमार मिश्र ने नगर कोतवाल को लिखे पत्र में कहा कि 22 अगस्त 2016 की रात पुलिस लाइन में हुई फायरिंग में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। जिसके संबंध में मजिस्ट्रियल जांच लंबित है।
जांच में पुलिस स्टाफ को बयान देने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है लेकिन पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रही है। नगर कोतवाल पोसीराम शर्मा ने बताया कि जल्द ही पुलिसकर्मियों को बयान दर्ज कराने के लिए भेजा जाएगा।