यमुना एक्सप्रेस वे की तर्ज पर मुआवजे की मांग को लेकर 12 गांवों के किसान अब कमिश्नर की शरण में पहुंच गए हैं। कमिश्नर ने बृहस्पतिवार को किसानों को वार्ता के लिए बुलाया है। किसानों ने कहा है कि जब तक एक्सप्रेस वे की तर्ज पर मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक किसान जमीन पर कब्जा नहीं देंगे। बता दें कि इस प्रोजेक्ट में विधायक बिमला सोलंकी की जमीन भी अधिग्रहित की गई थी।
डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर के लिए रेलवे ने बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद तहसील क्षेत्र में भूमि का अधिग्रहण किया है। बुलंदशहर और सिकंदराबाद क्षेत्र के 12 गांवों के किसान रेलवे को जमीन पर कब्जा नहीं दे रहे हैं। किसानों का कहना है रेलवे ने कम कीमत पर जमीन अधिग्रहण की है। इसलिए रेलवे को मुआवजा बढ़ाना होगा।
बता दें कि रेलवे को एक अगस्त से फ्रेट कारीडोर का निर्माण शुरू करना है। इसलिए किसान कमिश्नर की शरण में पहुंच गए हैं। बृहस्पतिवार को मेरठ में कमिश्नर और किसान प्रतिनिधियों के बीच बैठक होगी। बैठक में निर्णय लिया जाएगा कि मुआवजा बढ़ेगा या नहीं। वहीं, किसानो का कहना है कि जब तक मुआवजा नहीं बढ़ेगा तब तक किसान जमीन से कब्जा नहीं छोड़ेंगे। एडीएम प्रशासन अरविंद कुमार मिश्र ने बताया कि मामला कोर्ट में है। किसानों को कब्जा देकर कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
जब तक वाजिब मुआवजा किसानों को नहीं मिलेगा तक तक किसान जमीन पर काबिज रहेंगे। बृहस्पतिवार को मेरठ में कमिश्नर ने किसानोें को वार्ता के लिए भी बुलाया है। - बिमला सोलंकी, विधायक, सिकंदराबाद