दहेज की खातिर जलाई गई महिला का शव एसडीएम के इंतजार में दो दिन तक अस्पताल में रखा रहा। दहेज की खातिर जलाई गई महिला की दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई थी। एसडीएम और तहसीलदार के बाहर होने के कारण शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया।
अस्पताल प्रबंधन ने बिना पोस्टमार्टम के शव परिजनों को सौंपने से हाथ खड़े कर दिए। दो दिन बाद एसडीएम के आने पर शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद परिजनों को बेटी का शव तीसरे दिन मिल सका। सिस्टम की लापरवाही का आलम यह है कि उसमें मानवीय संवेदनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है।
अपनी पसंद के काम को करने के लिए अफसर दिनरात तैयार रहते हैं, जबकि किसी व्यक्ति के महत्वपूर्ण कार्य को भी हवा में उड़ा देना इनकी फितरत बन जाती है। इसका ताजा उदाहरण क्षेत्र के एक परिवार की हालत से लगाया जा सकता है, जिसको दहेज हत्या की बलिवेदी पर चढ़ा दी गई बिटिया का शव पाने के लिए दो दिन इंतजार करना पड़ा।
साहब के आने के इंतजार में शव दो दिन तक अस्पताल में ही पड़ा रहा। अहार थाना क्षेत्र के गांव जटपुरा निवासी नरेन्द्र सिंह की पुत्री रश्मि की शादी औरंगाबाद क्षेत्र के गांव सैदपुरा निवासी सुधीर के साथ ढाई साल पहले हुई थी। अतिरिक्त दहेज में दो लाख रुपये की मांग को लेकर ससुरालियों ने 13 जून की देर शाम रश्मि को जला दिया था। उसका उपचार दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था।
मंगलवार को रश्मि ने दम तोड़ दिया। दिल्ली में सफदरजंग क्षेत्र के एसडीएम और तहसीलदार के किसी मामले में बाहर जाने के कारण मृतका का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। एसडीएम और तहसीलदार के आने पर ही मृतका के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। बृहस्पतिवार रात शव को गांव लाकर अंतिम संस्कार कर दिया।
एसओ औरंगाबाद तेज सिंह ने बताया कि महिला की मौत होने की विधिवत जानकारी अभी नहीं मिली है। तीनों आरोपियों पर जलाने के प्रयास का मुकदमा ही दर्ज है। ब्यूरो