कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर से इंश्योरेंस के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। साथ ही कंपनी के घोषणा पत्र पर डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
पीड़ित डॉक्टर ने एक नामी बैंक के कर्मचारी और इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट पर आरोप लगाते हुए एसएसपी को तहरीर दी है। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चाणक्यपुरी राजाबाबू रोड निवासी डॉ. जीवन चंद मुदगल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका एक नामी बैंक में खाता है। बैंक का उस समय एक इंश्योरेंस कंपनी से अनुबंध था।
वर्ष 2009 में बैंक के कर्मचारी दीपक सिंघल और इंश्योरेंस के एजेंट सजेंद्र सिंह ने पांच साल की एक पॉलिसी के बारे में बताकर पॉलिसी लेने के लिए दबाव बनाया। डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने 99 हजार रुपये प्रतिवर्ष करके चार लाख 95 हजार रुपये पांच समान किश्तों में जमा कर दिए।
20 जनवरी 2014 को पॉलिसी की अवधि समाप्त होने के बाद मोबाइल पर एक किश्त बाकी होने का मैसेज मिला। जानकारी की तो पता चला कि कंपनी द्वारा पॉलिसी से पहले जारी किए गए घोषणा पत्र में लिखा है कि किश्त की प्रथम धनराशि को कंपनी के द्वारा एलोकेशन चार्ज में समायोजित किया जाएगा।
कंपनी के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर देखे तो पता चला कि वह हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। ना ही यह घोषणापत्र सजेंद्र और दीपक ने दिखाया था। इस तरह दोनों ने धोखाधड़ी करके घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। जिसके चलते पीड़ित डॉक्टर के आज तक पॉलिसी की धनराशि नहीं मिल सकी है।
नगर कोतवाल आरके सिंह ने बताया कि एसएसपी के आदेश पर दीपक व सजेंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।