होली पर मिलावटी खाद्य सामग्री आम आदमी की सेहत बिगाड़ सकती है। आलम यह है कि बाजार मूल्य से कम रेट पर मावा-पनीर बिकने लगा है। ऐेसे में एक्सपर्ट का कहना है कि कम कीमत का मिलावटी पनीर, दूध और मावा सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
होली के मद्देनजर गांव और कस्बों में पनीर, मावा और दूध बाजार रेट से कम कीमत पर बेचा जा रहा है। खासबात यह है कि मावा और पनीर आम आदमी से ज्यादा मिठाई आदि बनाने वाले दुकानदार खरीद रहे हैं। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि होली के रंगों में आपको मिलावटी सामग्री से बनी मिठाई खिलाने की पूरी तैयारी मिलावटखोरों ने की ली है।
वहीं, फूड अफसर कार्रवाई के बजाय खानापूर्ति में लगे हुए हैं। मुंह देखकर सैपलिंग की जा रही है। सिकंदराबाद, खुर्जा, स्याना, डिबाई, गुलावठी, अनूपशहर, शिकारपुर आदि क्षेत्रों में नामचीन दुकानों पर सैपलिंग नहीं की गई है। दिखावा मात्र के लिए छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई की जा रही है। जानकारों के मुताबिक अधिक मुनाफे के चक्कर में मिलावटखोर मावा से क्रीम निकाल रिफाइंड से चिकना कर दे रहे हैं।
गहरे रंग की मिठाई मिलावटी
चीफ फूड सेफ्टी अफसर मनोज कुमार ने बताया कि चटक रंग देने के लिए फूड आइट्मस में सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं। उत्पादन कॉस्ट कम करने के लिए धंधेबाज चांदी के वर्क के बजाय एल्यूमिनियम की परम का इस्तेमाल मिठाई की खूबसूरती बढ़ाने में करते हैं।
चांदी और एल्युमीनियम की परख आसान है। उंगलियों से मसलने पर चांदी का वर्क गायब हो जाता है जबकि एल्युमीनियम का वर्क लिपट जाता है। खाद्य सामग्री में मिलावट को रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। तीन दिन में 56 नमूने सील किए गए हैं। सैपलिंग की कार्रवाई की जा रही है।-डॉ. गौरी शंकर, डीओ, फूड सेफ्टी