कोतवाली देहात पुलिस से पीड़ितों का भरोसा उठ गया है। हत्या के मामले में खेल करने वाली पुलिस से केस की विवेचना ही छिन गई है। डीजी ऑफिस के निर्देश पर डीआईजी ने हापुड़ क्राइम ब्रांच को जांच सौंपने के आदेश दिए हैं। पीड़ित पक्ष ने दूसरे पक्ष से मिलकर विवेचना में खेल करने का आरोप लगाया था।
18 जून 2016 में कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव दरियापुर में प्लॉट के विवाद को लेकर मन्नान नामक युवक की गोली माकर हत्या कर दी थी। मृतक पक्ष की ओर से गांव निवासी जमीर, जफीर, शारिक और तालिब के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
बाद में आरोपी पक्ष ने कोर्ट के आदेश पर पीड़ित परिवार के खिलाफ जानलेवा हमले की धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी थी। मन्नान पक्ष की ओर से मोहम्मद सूफियान ने डेढ़ माह पहले डीजीपी कार्यालय में एक शिकायती पत्र भेजा था।
जिसमें उसने आरोप लगाया था कि विवेचक ने दूसरे पक्ष से सांठगांठ करके जबरन केस को लटका रखा है। जबकि आरोपियों की ओर से कोर्ट के आदेश पर दर्ज कराई एफआईआर फर्जी है। डीजी कार्यालय आई टीम ने विवेचक और कोतवाल के बयान दर्ज किए।
जांच में टीम ने पुलिस द्वारा की गई विवेचना में लापरवाही माना। साथ ही विवेचक और कोतवाल की भूमिका की एसपी रैंक के अधिकारी से जांच कराने की संस्तुति की थी। जिसके बाद डीआईजी मेरठ रेंज ने केस की विवेचना हापुड़ क्राइम ब्रांच ट्रांसफर करने के आदेश दिए थे। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने बताया कि केस की विवेचना हापुड़ क्राइम ब्रांच कर दी है।