प्रेम संबंधों का विरोध करने और प्रॉपर्टी को जल्द हासिल करने के लिए दादा-दादी की हत्या करने के मामले में पोती और उसके प्रेमी को कोर्ट ने दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार(न्याय कक्ष संख्या-7) ने सुनाया है।
वादी निजाम ने कोतवाली नगर में 16 दिसंबर 2011 को दर्ज कराई एफआईआर में बताया था कि उसके खालू भुल्ला खां एवं खाला अनवरी नयागांव में रहते थे। उनकी दो पुत्रियां सरवरी एवं सज्जों अपनी ससुराल में रहती हैं। जबकि पोती शमा उनके पास ही रहती है।
निजाम ने आरोप लगाया कि शमा के शादी से पहले पड़ौसी जीतू उर्फ जितेंद्र से संबंध थे। एक बार जीतू उसको लेकर भाग गया था। उसके बाद शमा की शादी कर दी गई, लेकिन शादी के बाद भी शमा के संबंध जीतू से बने रहे। शमा अपने पति की बजाए दादा भुल्ला खां के घर पर ही रहने लगी। भुल्ला खां ने कुछ प्रॉपर्टी की वसीयम शमा के नाम कर रखी थी।
इसी प्रॉपर्टी एवं बैंक में जमा रुपये का हड़पने के लिए शमा ने प्रेमी जीतू के साथ मिलकर सोते वक्त भुल्ला खां एवं अनवरी की हत्या कर दी। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की। न्यायाधीश ने दोनों को दोषी मानते हुए दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।