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जमीन के लालच में परविंदर और फिरोज ने दिया था साजिश को अंजाम

Fri, 10 Feb 2017 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
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क्राइम - फोटो : अमर उजाला
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खुर्जा सीट से रालोद प्रत्याशी मनोज गौतम के छोटे भाई विनोद और उसके दोस्त की हत्या परविंदर और फिरोज ने जमीन के लालच में की थी। परविंदर ने अलीगढ़ स्थित अपने गांव में और फिरोज ने मामन खुर्द स्थित अपने गांव में जमीन का चयन भी कर लिया था। मनोज गौतम ने चुनाव जीतने के बाद जमीन का बैनामा कराने का वादा किया था।

आरोप है कि खुर्जा सीट से रालोद प्रत्याशी मनोज गौतम ने मतदाताओं की सहानुभूति लेने के लिए अपने भाई विनोद गौतम और उसके दोस्त सचिन की छह फरवरी की रात हत्या करा दी। इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए परविंदर-फिरोज और मनोज के बीच बड़ी डील हुई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार मनोज गौतम ने परविंदर और फिरोज को उन्हीं के गांव में जमीन दिलाने का वादा किया था।
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कुछ समय पहले मनोज ने अलीगढ़ स्थित अपने गांव में पांच बीघा जमीन चिह्नित भी कर ली थी जबकि फिरोज ने थाना खुर्जा देहात क्षेत्र स्थित मामन खुर्द गांव में जमीन चिह्नित कर ली थी। चुनाव बाद विधायक बनने का सपना संजोए मनोज गौतम ने दोनों से जमीन का बैनामा कराने का वादा किया था। पुलिस ने मनोज गौतम और फिरोज को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

एसएसपी सोनिया सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में कई तथ्य विवेचनाधिकारी के सामने आए हैं। सभी की जांच की जा रही है। इसका खुलासा परविंदर की गिरफ्तारी के बाद ही हो पाएगा।

 परविंदर ने ऐन मौके पर बदली योजना
 खुर्जा सीट से चुनाव लड़ रहे रालोद प्रत्याशी मनोज गौतम के भाई विनोद गौतम की हत्या के मामले में नई जानकारी सामने आई है। मुख्य आरोपी परविंदर ने एन वक्त पर स्क्रिप्ट बदली और विनोद के साथ सचिन की भी हत्या कर दी। परविंदर किसी भी कीमत पर कोई रिस्क नहीं उठाना चाहता था।

परविंदर की स्क्रिप्ट में विनोद को अगवा कर कुछ दिन तक जिंदा रखने के बाद हत्या करना था, लेकिन सचिन के आने से उसे अपनी प्लानिंग बदलनी पड़ी। बता दें कि रालोद प्रत्याशी मनोज कुमार गौतम चार करोड़ के कर्ज से उबरने के लिए हर कीमत पर विधायक बनना चाहता था। इसके चलते उसके मन में अपने सगे-संबंधी की चुनाव के दो-चार दिन पहले हत्या कराने का विचार आया था।

इस बारे में उसने परविंदर से बात की और परविंदर ने स्क्रिप्ट तैयार की। पुलिस सूत्रों के अनुसार परविंदर की स्क्रिप्ट में सिर्फ विनोद का अपहरण करना था। अपहरण के कुछ दिन बाद विनोद की हत्या कर आरोप विपक्षियों पर मढ़ना था लेकिन जब उसने एन वक्त पर विनोद के साथ उसके दोस्त सचिन को देखा तो दोनों की हत्या करने की ठान ली।

परविंदर किसी भी कीमत पर सचिन को जिंदा सबूत के तौर पर छोड़ने की गलती नहीं करना चाहता था। उसने ऐसा ही किया।

जेल में रात भर नहीं सोया मनोज
भाई व उसके दोस्त की हत्या कराने के बाद पुलिस ने मनोज को बुधवार दोपहर जेल भेज दिया था। जेल अधीक्षक विजय विक्रम सिंह ने बताया कि मनोज गौतम को बैरक नंबर एक में रखा गया है। जेल में पहुंचने के बाद मनोज ने ज्यादा लोगों से बात नहीं की। रातभर करवट बदलते-बदलते गुजारी। सुबह भी वह जल्दी ही उठ गया।

‘मैं जेल जा रहा हूं, तुम लोग चुनाव देख लेना’
बुधवार दोपहर जेल जा रहे मनोज को अपने भाई की मौत का गम नहीं था। मनोज को सिर्फ और सिर्फ अपने चुनाव की चिंता है। जेल जाने से पहले मनोज से मिलने आए गांव के लोगों से मनोज ने कहा कि वह जेल जा रहा है। क्षेत्र में जाकर चुनाव की तैयारियां जारी रखना। उसे हर हाल में चुनाव जीतना है।

परविंदर की तलाश में ताबड़तोड़ छापे
 रालोद प्रत्याशी के भाई और दोस्त की हत्या के तीन दिन बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर है। उसकी तलाश में पुलिस अलीगढ़ स्थित उसके गांव से लेकर रिश्तेदार और अन्य ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। परविंदर की गिरफ्तारी से कई नए रहस्यों से पर्दा उठ सकता है।

गौरततलब हो कि छह फरवरी को रालोद प्रत्याशी मनोज गौतम और फिरोज को पुलिस ने चुनाव में सहानुभूति बटोरने के लिए अपने ही भाई की हत्या कराने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वहीं फरार चल रहा मुख्य आरोपी परविंदर की तलाश में पुलिस उसके अलीगढ़ स्थित गांव और अन्य ठिकानों पर दबिश दे रही है।

किस्मत से बच गया एक और करीबी
बुलंदशहर (ब्यूरो)। रालोद प्रत्याशी के भाई और उसके मित्र के हत्याकांड में एक करीबी रिश्तेदार किस्मत से बच गया। यह करीबी रिश्तेदार विनोद के साथ गाड़ी में भी बैठ गया था, लेकिन अचानक आए फोन के चलते वह उतर गया। यदि यह करीबी रिश्तेदार भी गाड़ी में होता तो मारा जाता।

खुर्जा में हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपी फिरोज को गिरफ्तार करने वाली टीम के एक पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह हत्याकांड दोहरा नहीं बल्कि तिहरा हो जाता। मनोज ने जयंत चौधरी की सभा के बाद शाम साढ़े छह बजे पार्टी कार्यालय के पीछे पहुंचकर छोटे भाई विनोद को फोन किया और अगवाल फाटक पर पहुंचने के लिए कहा।

विनोद कार से अगवाल फाटक के लिए निकला। उसके साथ उसका दोस्त सचिन भी बैठ गया। इसके अलावा गाड़ी में मनोज का एक रिश्तेदार भी बैठ गया। जैसे ही तीनों चलने लगे तो रिश्तेदार पर किसी का फोन आ गया, जिसके बाद वह कार से उतर गया।

यादव सिंह का करीबी रहा है रालोद प्रत्याशी मनोज गौतम
विधायकी की चाहत में अपने भाई और उसके दोस्त की हत्या कराने का आरोपी रालोद प्रत्याशी मनोज गौतम नोएडा अथॉरिटी घोटाले के मुख्य आरोपी यादव सिंह का करीबी रहा है। कुछ साल पहले करोड़ों रुपये गबन का विवाद होने के चलते दोनों के संबंध टूट गए थे।

यादव सिंह का साथ छूटने के बाद मनोज ने सिकंदराबाद क्षेत्र के एक बसपा नेता के सानिध्य में राजनीति सीखी और नेता बनने की ओर कदम बढ़ा दिए। क्षेत्र के गांव सहपानी निवासी मनोज गौतम ककोड़ थाना क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में क्लर्क था। इस दौरान मनोज की नजदीकी तत्कालीन नोएडा अथॉरिटी के सीईओ यादव सिंह से हो गई थी।

कई साल साथ रहने के बाद दोनों के संबंध टूट गए। गांव सहपानी में चर्चा है कि मनोज गौतम और यादव सिंह के बीच 20 करोड़ रुपये को लेकर विवाद था। यादव सिंह का साथ छूटने के बाद मनोज ने सिकंदराबाद क्षेत्र के एक बसपा नेता की शरण ली। मनोज ने उन्हीं के सानिध्य में राजनीति सीखी। इसके बाद मनोज ने धीरे-धीरे 40 बीघे जमीन खरीद ली। 
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शॉर्टकट से राजनीति में जल्द ऊंचाईयां छूने की तमन्ना रखने वाला मनोज आज अर्श से फर्श पर आ गया है। यादव सिंह नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे थे। उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा था जिसमें करोड़ों रुपये के जेवरात मिले थे। इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है।

 
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