बुलंदशहर (ब्यूरो)। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से झुलसी बिटिया को बेशक अभी तक उपचार न मिल सका हो, लेकिन जांच के नाम पर जमकर तमाशा हो रहा है। अब मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर मामले की जांच सीओ सिटी करेंगे। पुरानी जांचों को क्या हुआ, यह किसी को नहीं पता। जांचों में उलझा प्रशासन अभी तक बिटिया को न तो उपचार मुहैया करा सका है और न ही आर्थिक मदद।
बता दें कि डीएम रोड स्थित झुग्गी पट्टी निवासी छह वर्षीया चंादनी पुत्री अख्तर हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गई थी। हादसे के बाद उपचार के दौरान चांदनी का एक हाथ भी डॉक्टरों को काटना पड़ा। कई महीनों तक किसी ने भी चांदनी की सुध नहीं ली।
इसके बाद अखिल भारतीय यादव महासभा के सचिव नितिन यादव ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत तमाम आयोगों से की। सभी ने मामले पर संज्ञान लिया। प्रधानमंत्री ने जहां प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की तो मुख्यमंत्री और तमाम आयोगों ने जांच के निर्देश दिए।
छह माह से दफ्तरों में धूल फांक रहा 50 हजार का चेक लेकर अफसर पीड़ित के पास पहुंचे, जिसे पीड़ित ने लेने से इंकार कर दिया। उसने पैसे लेने की जगह बिटिया का उपचार कराने की बात कही, लेकिन बिटिया को उपचार नहीं मिल सका। अब मानवाधिकार आयोग ने हाईटेंशन लाइन से झुलसी बिटिया के मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।
सचिव नितिन यादव ने बताया कि उनके पास मामले की जांच से संबंधित सीओ सिटी डॉ. धर्मेन्द्र कुमार यादव का फोन आया और उन्होंने मामले की पूरी जानकारी ली।