प्रतिबंध के बावजूद एक अस्पताल में भ्रूण जांच के बाद गर्भवती को झूठ बोलकर अबॉर्शन करने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक भ्रूण जांच में महिला को बेटी होना बताया गया। वहीं, अबॉर्शन में बेटे का भ्रूण निकलने पर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया। सीएमओ ने पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम समेत उच्चाधिकारियों को भेजी है। महिला के परिजनों की तहरीर पर अस्पताल संचालक के खिलाफ नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
जानकारी के मुताबिक जहांगीराबाद क्षेत्र के जाड़ौल गांव निवासी ममता पत्नी प्रवीण कुमार करीब चार माह के गर्भ से थी। प्रवीण ने बताया कि शनिवार को वह भूड़ रोड स्थित शोभाराम अस्पताल में पत्नी का अल्ट्रासाउंड कराने आया। अस्पताल के एक कंपाउंडर ने कहा कि वह पांच हजार रुपये में भ्रूण की लिंग जांच कर देगा। अगर जरूरत पड़ी तो अबॉर्शन भी करवा देगा। इस काम के लिए चार हजार में बात तय हो गई।
अारोप है कि अल्ट्रासाउंड करने के बाद अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बेटी का भ्रूण है। प्रवीण का कहना है कि उसके पहले से ही तीन बेटियां थीं और डॉक्टर के उकसावे में आकर उसने अपनी पत्नी को अबॉर्शन के लिए तैयार किया और डॉक्टर की दी दवा उसे खिला दी।
देर रात जब भ्रूण निकला तो वह बेटे का था। बेटे का भ्रूण देखकर पिता समेत सभी परिजनों सकते में आ गए। रविवार सुबह जब डॉक्टर अस्पताल में आया तो परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। डॉक्टर पर लिंग जांच कर गुमराह करने का आरोप लगाया। करीब दो घंटे तक अस्पताल में हंगामा चलता रहा।
सूचना सीएमओ और पुलिस को दी गई। सीएमओ के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। महिला के परिजनों अस्पतला कर्मियों आदि से बात की और जिस अल्ट्रासाउंड मशीन से लिंग परीक्षण किया गया था, उसे सील कर दिया। वहीं, प्रवीण ने आरोपी शोभाराम अस्पताल के संचालक के खिलाफ नगर कोतवाली में तहरीर दी। जिसके आधार पर पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
अस्पताल संचालक और स्टाफ भागे
परिजनों के हंगामे के बाद अस्पताल संचालक और अधिकांश स्टाफ मौके से भाग गए। सीएमओ और डिप्टी सीएमओ ने अस्पताल पहुंचकर महिला चिकित्सक और स्टाफ के भी बयान भी दर्ज किए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के कई रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। सीएमओ ने मामले की पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी समेत उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
डॉक्टर के साथ दंपति भी दोषी
तीन माह के बाद गर्भपात केवल मेडिकल ग्राउंड पर ही हो सकता है। विशेष परिस्थिति में गर्भपात केवल सरकार द्वारा चिह्नित अस्पतालों में ही कराया जा सकता है। इसके लिए भी दो वरिष्ठ चिकित्सकों का पैनल गर्भपात पर फैसला करता है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत अवैध तरीके से गर्भपात कराने में जितना दोषी अस्पताल संचालक होता है, उतना ही दोषी गर्भपात कराने वाला होता है।
अस्पताल का रजिस्ट्रेशन भी हो सकता है रद्द
अस्पताल में लिंग जांच और अबॉर्शन की जानकारी मिलते ही सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी के नेतृत्व में डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान, एसीएमओ डॉ. अवनींद्र ने अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया। स्वास्थ्य विभाग अस्पताल संचालक के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई करेगा। इसके तहत अस्पताल का रजिस्ट्रेशन तक रद्द किए जाने का प्रावधान है।
जानकारी मिलते ही अस्पताल संचालक के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया गया है। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की संस्तुति की जाएगी। पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी समेत उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ
बच्चे के पिता प्रवीण गिरी की तहरीर पर अस्पताल संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच कर आगे की कार्यवाई की जाएगी। - आरके सिंह, प्रभारी, नगर कोतवाली
मेरे खिलाफ गलत शिकायत की गई है। अस्पताल में किसी की भी लिंग जांच और अबॉर्शन नहीं किया गया है। मै अपना पक्ष जिलाधिकारी और सीएमओ के समक्ष रखूंगा। - डॉ. बीपीएस तेवतिया, संचालक, शोभाराम अस्पताल
‘सोच में बदलाव जरूरी’
प्रवीण गिरी की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी सिम्मी (12), खुशी (5) और छोटी बेटी माही (2) साल की हैं। लगातार तीन बेटियां होने से प्रवीण और उसकी पत्नी ममता को बेटे की लालसा बढ़ गई थी। ममता के करीब चार माह पूर्व गर्भ ठहरा। कुदरत उसकी गोद में बेटा ही डालती।
लेकिन लालच के कारण वह भी खो गया। अल्ट्रासाउंड में डॉक्टर द्वारा लड़की बताने पर दंपति तुरंत गर्भपात के लिए तैयार हो गए, जबकि तीन माह बाद गर्भपात कराना कानूनन अपराध के अलावा कुदरत के बनाए नियमों के भी खिलाफ है। गर्भपात के बाद जब दंपति को बेटे की बात पता चली तो अब दोनों प्रायश्चित कर रहे हैं।
इस तरह की घटनाएं समाज में दूषित सोच को उत्पन्न करती हैं। बेटी बचाने को लेकर चल रहे अभियानों पर इस तरह की घटनाएं मुंह चिढ़ाती हैं। जब तक सोच में बदलाव नहीं आएगा, तब तक ऐसी घटनाएं देखने को मिलती रहेंगी। - प्रो. ओपी सिंह, समाजशास्त्री