दबंगों का कब्जा होने से जनपद के 270 तालाबों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। वहीं, 60 हैंडपंपों पर भी अवैध कब्जा होने से गांववासियों को पीने के साफ पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। तालाबों पर कब्जा होने से गांवों में भी पानी का स्तर गिरने के साथ पशु-पक्षिओं को भी फजीहत झेलनी पड़ रही है।
इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई की जगह हाथ पर हाथ धरे बैठा है। जनपद में 951 गांवों में ग्राम्य विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक करीब 700 तालाब हैं। अतिक्रमण के चलते 700 में से 270 तालाबों की जमीन सिकुड़ गई है। पानी की मात्रा न के बराबर होने से तालाबों का वजूद लगभग खत्म हो गया है।
बुलंदशहर, सिकंदराबाद, खुर्जा, स्याना, डिबाई, शिकारपुर, अनूपशहर, ऊंचागांव, लखावटी, बीबीनगर, गुलावठी, दानपुर, अरनिया, पहासू, अगौता आदि क्षेत्रों में दबंगों ने तालाब और हैंडपंपों पर कब्जा किया हुआ है। जिला प्रशासन के आदेश पर अभियान चलाकर तालाबों से कब्जा हटवा दिया जाता है, लेकिन मॉनीटरिंग नहीं होने से फिर से दबंगों का कब्जा हो जाता है।
वहीं, नगर के इस्लामाबाद क्षेत्र में हैंडपंप पर सबमर्सिबल फिट कर दबंगों ने एकाधिकार कर लिया है। नरसलघाट, चांदपुर, काली नदी क्षेत्र और स्याना रोड आदि पर दबंगों ने हैंडपंपों पर कब्जा किया हुआ है। जलनिगम के अधिकारी जानकर भी अंजान बने हुए हैं।
इस बाबत एडीएम वित्त आरके सिंह का कहना है कि जल निगम के अफसरों को समय-समय पर सख्त हिदायत दी जाती है। फिर मामले की जांच कराकर तालाबों और हैंडपंपों को दबंगों के कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।