बुलंदशहर में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लिंग परीक्षण करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर नकेल कसने में जिले के स्वास्थ्य अफसर नाकाम रहे हैं। इसका खुलासा सोमवार को हरियाणा की टीम ने छापेमारी कर सीएमओ कार्यालय से महज पांच सौ मीटर पर चल रहे गोरखधंधे का खुलासा कर किया है।
कन्या भ्रूण हत्या में अल्ट्रासाउंड केंद्रों की सबसे अहम भूमिका होती है। लिंग परीक्षण कराकर कुछ लोग कन्या भ्रूण को कोख में ही मार देते हैं। प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने और कन्या लिंगानुपात बढ़ाने के लिए लिंग परीक्षण पर रोक लगा दी गई है।
साथ ही पीसी/पीएनडीटी एक्ट के तहत इसे अपराध मानते हुए कार्रवाई करने का प्रावधान है। कानून बन जाने के बाद भी जब कन्या भ्रूण हत्या का सिलसिला नहीं थमा तो सरकार ने केंद्रों की कारगुजारी पता करने के लिए मुखबिर योजना लागू कर दी। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व इस योजना को लागू किया गया था, लेकिन अब तक एक भी मुखबिर ऐसा नहीं मिला जो किसी केंद्र की शिकायत दर्ज करा उसकी कारगुजारी का खुलासा करता।
जिला पीसी/पीएनडीटी एक्ट समिति भी समय समय पर चेकिंग का दावा तो करती है लेकिन उसे भी जिले के केंद्रों की कारगुजारियां नजर नहीं आईं। अफसरों के चेकिंग के दावों को हरियाणा की पीसी/पीएनडीटी टीम ने सोमवार को रामा अस्पताल पर छापा मारकर झूठा साबित कर दिखाया।
हरियाणा के पलवल की पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि बुलंदशहर में लिंग परीक्षण की शिकायत मिलने पर छापामारी की गई। इस दौरान एक केंद्र पर लिंग परीक्षण होते हुए मिला। वहीं, जिले के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव प्रकाश ने बताया कि जिले में अभी तक एक भी मुखबिर योजना के लिए नहीं मिला है। साथ ही बताया कि जिले के किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लिंग परीक्षण नहीं किया जा रहा है।