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तेल चोर गैंग का है माफिया कनेक्शन

Thu, 18 Oct 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर
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तेल चोरी करने वाला गिरोह - फोटो : अमर उजाला
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सिकंदराबाद। रिलायंस डिपो के टैंकरों से तेल चोरी करने वाले गैंग का माफिया कनेक्शन भी जांच में सामने आया है। वहीं इस पूरे प्रकरण में सफेदपोश की भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
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कोतवाल अवनीश कुमार गौतम ने बताया कि तेल चोर गैंग के फरार सदस्य जारचा जनपद गौतमबुद्ध निवासी टिल्लू का संबंध इंद्रपाल नूरपुरिया, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंग मुकीम काला गैंग से है। इंद्रपाल नूरपुरिया एक लाख का इनामी बदमाश था जो पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

वहीं इंद्रपाल नूरपुरिया, मुकीम काला गैंग का संबंध फिरोज पव्वा और अनिल दुजाना गैंग से है। बताया कि तेल चोरी के इस खेल में सफेदपोश की भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। जांच के बाद मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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क्षेत्र में तेल चोरी का नया नहीं मामला
टैंकरों से तेल चोरी की घटना का मामला नया नहीं है। पूर्व में भी ककोड़ क्षेत्र में टैंकरों से तेल चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। मथुरा रिफाइनरी से गाजियाबाद दिल्ली तेल सप्लाई करने के लिए जाने वाले टैंकर ककोड़ के रास्ते आते हैं। बीते अक्तूबर 2016 में तत्कालीन एसडीएम अतुल कुमार ढाबों पर छापा मारकर टैंकरों से तेल चोरी की घटना का भंडाफोड़ किया था। वहीं ककोड़ पुलिस ने वर्ष 2017 में टैंकरों से तेल चोरी की घटना का खुलासा किया था। इस संबंध में थाना ककोड़ पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

लोगों की जेब पर डाला जा रहा डाका
तेल चोरी के इस पूरे प्रकरण में परोक्ष रूप से आम लोगों की जेब को चूना लग रहा था। डिपो से तेल लेकर जाने वाले टैंकरों से तेल चोरी होने के कारण पेट्रोल पंपों पर तेल की मात्रा पूरी नहीं हो पाती थी। तेल की घटतौली को पूरा करने के लिए पंप कर्मी वाहनों में तेल डालने के दौरान तेल की घटतौली करते थे। इसका बोझ जनता पर पड़ता था।

पुलिस की आंखों में धूल झोंककर माफिया खेल रहे थे तेल का खेल
तेल चोर गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार कर तेल के खेल का पर्दाफाश कर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है। मगर काफी दिनों से तेल माफिया पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर तेल चोरी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। पुलिस को प्रकरण के बारे में काफी समय बाद जानकारी होना, कहीं न कहीं पुलिस की कार्य प्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा करता है।
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