पिलखना कांड : तीन अभियुक्तों की फांसी की सजा बरकरार
बुलंदशहर। नरौरा थाना क्षेत्र के गांव पिलखना में एक ही परिवार के छह सदस्यों के सामूहिक हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। जबकि, एक आरोपी महिला को संदेह के आधार पर राहत देते हुए उसे बरी कर दिया गया है। बता दें कि इस मामले में सत्र न्यायालय ने दो साल पहले चारों अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नवनीत कुमार शर्मा ने बताया कि नरौरा थाना क्षेत्र के गांव पिलखना गांव में एक भट्टे के विवाद के चलते एक ही परिवार के छह सदस्य मौसम खां, असगरी, शैकीन खां, सन्नो, समद व मुस्कान की 23 जनवरी 2014 को धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई थी। वादी अली शेर पुत्र मौसम खां ने अपने सगे भाई मोमीन खां, उसकी पत्नी नाजरा, ताऊ के बेटे जैकम, जैकम के बेटे साजिद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बताया कि सामूहिक नरसंहार की घटना वाली रात अली शेर व उसके बहनोई ने अपनी जान बचाते हुए पूरी घटना को रसोई में छिपकर देखा था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र जिला एव सत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। नरसंहार की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम सुनील कुमार न साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर 11 जनवरी 2016 को मोमीन खां, नाजरा, साजिद व जैकम को फंासी की सजा सुनाई थी। निर्णय के खिलाफ चारों आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अधिवक्ता ने बताया कि 18 मई 2018 को हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए संदेह के आधार पर आरोपी नाजरा को बरी कर दिया, जबकि मोमीन खां, जैकम व साजिद की फांसी की सजा बरकरार रखी है। बता दें कि दो साल के अंदर आए इस फैसले में अच्छी पैरवी करने के लिए डीजे अभियोजन ने नवनीत कुमार शर्मा को सम्मानित भी किया था।