पिता ने उठा लिया होता विकास का फोन तो पकड़े जाते बदमाश
- बदमाशों की आहट सुनकर विकास ने पिता रामकुमार को की थी कॉल
- 100 नंबर पर सूचना देते तो समय रहते मिल जाती पुलिस की मदद
विकास वत्स
बुलंदशहर। बदमाशों की आहट सुनकर विकास की नींद खुल गई थी और उसने खेत पर गए पिता को फोन किया था। पिता ने कॉल रिसीव नहीं की। कॉल रिसीव हो जाती तो बदमाश पकड़े जा सकते थे। विकास इसके बाद 100 नंबर पर पुलिस को फोन कर दिया होता तो भी बदमाश पुलिस की गिरफ्त में आ सकते थे। घटना स्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर ही पुलिस टीम गश्त कर रही थी।
बदमाशों के बंधक बने पीड़ित विकास चौधरी ने बताया कि वह घर के एक कमरे में पत्नी व चार माह की बच्ची के साथ सो रहा था। इस दौरान कमरे सेे बाहर कुछ आहट और बदमाशों की सुगबुगाहट से उसकी नींद खुल गई। विकास के पिता घटना के वक्त खेत पर थे, घर में डकैती का उन्हें अंदेशा नहीं था। विकास ने पिता रामकुमार को फोन किया। फोन की घंटी बजती रही, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इस दौरान बदमाशों ने कमरे की खिड़की तोड़ दी और तीन राइफल व बंदूकों की नाल विकास चौधरी, उसकी पत्नी और चार माह की बच्ची पर तन गईं। इसके बाद विकास को दोबारा कॉल करने का मौका नहीं मिला और बदमाशों ने दरवाजा खुलवा लिया।
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इस बार भी जूते ले गए चप्पल छोड़ गए बदमाश
थाना क्षेत्र में पूर्व में हुई डकैती की तीन घटनाओं की तरह इस बार भी बदमाश पीड़ितों के एक जोड़ी जूते ले गए और चप्पल छोड़कर चले गए। पूर्व में हुई वारदातों में बदमाशों ने पहली डकैती में चोरी किए गए जूतों को दूसरी डकैती के दौरान पीड़ित के घर छोड़ा था। छोड़े गए जूतों की पीड़ितों ने शिनाख्त भी की थी। वहीं पूर्व की डकैती में शामिल चार फुट के बदमाश की इस डकैती में शामिल होने की चर्चा है। बदमाशों द्वारा छोड़े गए जूतों और चार फुट के बदमाश के घटना में शामिल होने की चर्चा से माना जा रहा है कि सभी वारदातों को एक ही गैंग ने अंजाम दिया है।
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झाझर-ककोड़ में था कड़ा पहरा
बेखौफ डकैतों को पुलिस का कितना डर है, इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को दिन में ही एसएसपी ने डकैतों की धरपकड़ व वारदातों पर अंकुश के लिए 14 टीमों का गठन किया था। रात करीब दो बजे तक एएसपी, सीओ सिकंदराबाद समेत कई टीम ककोड़ व झाझर में गश्त कर रही थीं। इसके बावजूद बदमाशों ने पुलिस को चुनौती देकर वारदात को अंजाम दे डाला।
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डॉग स्क्वाएड, फोरेंसिक टीम ने की जांच पड़ताल
डकैती के बाद शनिवार सुबह गांव में डॉग स्क्वाएड और फोरेंसिक टीमें पहुंच गई। रामकुमार चौधरी के घर से फोरेंसिक टीम ने फिंगर प्रिंट लिए। हालांकि अभी तक बदमाशों का सुराग नहीं लगा है। पुलिस का कहना है कि गांव में रिटायर्ड फौजी के घर हुई घटना को संदिग्ध इसलिए भी माना जा रहा क्योंकि जब डॉग स्क्वाएड को रामकुमार के घर से निकाला गया तो वह रिटायर्ड फौजी के घर की तरफ नहीं गया। फौजी ने अभी तक तहरीर नहीं दी है।
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क्षेत्र में दहशत, लोग परेशान
क्षेत्र में ताबड़तोड़ डकैतियों का खुलासा तो दूर पुलिस वारदातों को रोक भी नहीं पा रही है। इसके चलते क्षेत्र के लोगों में दहशत है। लोग खुद ही अपनी सुरक्षा करने पर मजबूर नजर आ रहे हैं। लोग रात भर जागकर चौकसी कर रहे हैं तो कुछ क्षेत्र से फिलहाल पलायन की सोच रहे हैं।
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कोट
पीड़ित विकास ने कई बार अपने पिता को फोन कॉल की थी, लेकिन फोन रिसीव नहीं हो सका। पुलिस को फोन किया गया होता तो तत्काल मदद दी जाती और शायद बदमाश पकड़े भी जा सकते थे। - जयवीर सिंह, प्रभारी थाना ककोड़