एक महीने में पांच डकैती, खुलासा एक भी नहीं
- ताबड़तोड़ डकैतियों से दहल उठा जनपद, पुलिस हुई फेल
- घटनाओं का खुलासा तो दूर पुलिस गैंग के फेर में ही उलझी
विकास वत्स
बुलंदशहर। एक माह। पांच डकैती। करीब 25 लाख रुपये का डाका। यह आंकड़े क्राइम कंट्रोल का दंभ भरने वाली जिला पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। ताबड़तोड़ वारदातों का खुलासा तो दूर पुलिस वारदात रोकने में भी फेल साबित हो रही है। बदमाश जिस तरह से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, उससे साफ है कि उनमें न तो पुलिस का कोई खौफ है और न पकड़े जाने का डर। ककोड़ और डिबाई क्षेत्र बदमाशों के निशाने पर है। डकैती की वारदातें एक ही गैंग द्वारा किए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस के सामने बदमाशों ने डकैती की पहली चुनौती 19 नवंबर को अहमदगढ़ क्षेत्र में पेश की थी। गांव ढकनगला में करीब 8 से 10 नकाबपोश हथियारबंद डकैतों ने बीएसएफ के जवान योगवीर सिंह के घर में उनके पिता व पत्नी को बंधक बना कर डाका डाला। नुकसान की कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी गई थी। पुलिस इस मामले को सुलझा भी नहीं पाई थी कि डकैतों ने 21 नवंबर की रात ककोड़ क्षेत्र के वैर निवासी धीरज पुत्र हरपाल का घर निशाना बना डाला। यह केस भी नहीं खुला। 23 नवंबर की रात ककोड़ क्षेत्र के गांव अरौंडा निवासी सुबोध शर्मा पुत्र चंद्रपाल शर्मा के परिवार को बदमाशों ने बंधक बनाकर करीब साढ़े चार लाख रुपये का डाका डाल दिया। इसके बाद बदमाशों ने ने डिबाई की दौलतपुर चौकी क्षेत्र के गांव दौरऊ निवासी राज मिस्त्री अखिलेश पुत्र गनेशील लाल व उसके परिजनों को 16 दिसंबर की रात बंधक बना लिया। यहां करीब एक लाख रुपये की डकैती पड़ी। पुलिस इस वारदात को चोरी में तब्दील करने में जुटी नजर आई। 24 घंटेे का समय ही गुजरा था कि डकैतों ने ककोड़ क्षेत्र में एक और डकैती डाल दी। श्रीमहमूदपुर में बलराम के यहां करीब दस लाख रुपये की डकैती डाल दी।
जिले के बार्डर के नजदीक हुईं सभी वारदातें
गत एक माह के भीतर हुई पांचों डकैती की वारदातों पर गौर करें तो यह बात आम है कि सभी वारदातें जिले के बॉर्डर एरिया में हुई हैं। वारदात कर दूसरे जिलों में आसानी से भाग जाना और वहां से दूर निकल जाना बदमाशों की रणनीति हो सकती है। डिबाई-अहमदगढ़ की वारदातों के क्षेत्र से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही अलीगढ़ जिला लग जाता है। दूसरी ओर ककोड़ क्षेत्र से गौतमबुद्धनगर का इलाका सटा हुआ है।
तीन डकैतियों में समानता, एक ही गैंग का शक
थाना क्षेत्र में गत एक माह के भीतर हुई तीनों डकैतियों के मामले में कई समानता है। जिससे माना जा रहा है कि यह एक ही गैंग का काम है। बदमाशों की भाषा अलग है। वह एक ही तरह की बताई जा रही है। सभी वारदात में बदमाशों की संख्या 10 से 12 बताई गई। वैर में पहली डकैती में बदमाश घर से चप्पल ले गए थे। वह चप्पल अरौंडा गांव में जिस घर में डकैती डाली उसमें मिली। अरौंडा में जूते ले गए। वह श्रीमहमूदपुर गांव में मिले। यह इत्तफाक से अधिक पुलिस के लिए चुनौती लगती है। गैंग अपने निशान छोड़ रहा है। हालांकि पुलिस इस पर अभी कुछ नहीं कह रही।
जूते-चप्पल का हार पहनकर आ रहे
जिन घरों में डकैतियां पड़ी हैं, वहां बदमाशों द्वारा गले में जूते का हार पहनने की बात कही गई। हालांकि यह कही सुनी भी हो सकती है। लेकिन यह चर्चाओं में है। पुलिस इस पर भी काम कर रही है। एक के बाद एक तीन वारदात के बाद लोगों में दहशत है। जिन घरों को निशाना बनाया गया है, वह आबादी से थोड़े दूर हैं।
ककोड़ के श्रीमहमूदपुर गांव में हुई वारदात की अज्ञात डकैतों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जांच की जा रही है। फोरेंसिक टीम ने मौके पर जाकर जांच की है। कुछ सुराग मिले हैं। जल्द ही डकैतों को गिरफ्तार किया जाएगा। - पीके तिवारी, प्रभारी एसएसपी