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महिला अपराधों पर नहीं लग रहा ब्रेक, कानून व्यवस्था हुई फेल

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महिला अपराधों पर नहीं लग रहा ब्रेक, कानून व्यवस्था हुई फेल
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बुलंदशहर। महिला अपराध पर लगाम लगा पाना पुलिस के लिए चुनौती साबित हो रहा है। लगातार बढ़ रहे महिला अपराधों के मामले पुलिस के लिए सिरदर्द बन गए हैं। महिला अपराध के कई मामलों में पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई, जिस कारण वह अपराध बड़ी वारदातों में तब्दील भी हो गए।
गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में महिला अपराधों पर लगाम लगा पाना पुलिस के लिए कड़ी चुनौती साबित हो रहा है। दिन प्रतिदिन यह मामले बढ़ते ही नजर आ रहे हैं। इन अपराधों पर लगाम लगाने की पुलिस की कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। यही, कारण रहा कि बीते करीब तीन माह में यह आंकड़ा इस वर्ष सबसे अधिक बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। यही नहीं, जनपद में बीते कुछ दिनों में दुष्कर्म पीड़िता को न्याय न मिलने के मामले भी प्रकाश में आए। खासतौर पर जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म पीड़िता की आरोपियों ने घर में घुसकर जलाकर हत्या कर दी थी। उक्त मामले में पांच आरोपी जेल जा चुके हैं। लेकिन, अभी भी एक आरोपी दंपती फरार है, जिस पर पुलिस ने इनाम घोषित किया हुआ है। इस वारदात से एक दिन पूर्व ही अनूपशहर थाना क्षेत्र में एक बीए एलएलबी की छात्रा ने सामूहिक दुष्कर्म मामले में कार्रवाई न होने पर आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में पीड़िता ने इस संबंध में अपनी आपबीती भी लिखी थी। यहीं नहीं गत तीन वर्षों का आंकड़ा देखें तो महिला अपराध बीते दो सालों में बहुत बढ़े हैं।
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ये हैं आंकड़े
वर्ष दुष्कर्म दुष्कर्म की कोशिश दहेज उत्पीड़न
2018 51 144 276
2019 43 135 224
2020 51 110 291
नोट :- वर्ष 2020 के आंकड़े अक्तूबर माह के अंत तक।
महिला अपराध के मामलों को तत्काल दर्ज कर उन पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, बीते कुछ माह में कई मामले गलत दर्ज कराए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई, लेकिन बाद में फर्जी पाए जाने पर उन्हें कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। महिला अपराधों पर लगाम लगाने के लिए जनपद पुलिस प्राथमिक तौर पर काम कर रही है।
- संतोष कुमार सिंह, एसएसपी
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